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सरकार ने कहा WhatsApp ने नहीं किया अलर्ट, कंपनी बोली- मई में दी थी जानकारी

नई दिल्ली। WhatsApp से दो दर्जन से अधिक लोगों के मोबाइल्स का सर्विलांस करने का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने मोबाइल मैसेजिंग ऐप से जवाब मांगा है। वहीं सरकार ने इस पूरे जासूस मामले को लेकर चिंता जताई है कि इस साल जून के बाद कम से कम दो बार व्हाट्सएपके शीर्ष अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से मुलाकात की, जिसमें जासूसी मामले का जिक्र तक नहीं किया। जबकि आईटी एक्ट के मुताबिक ऐसा करना उसके लिए बाध्यकारी है। वहीं दूसरी तरफ व्हाट्सएप ने दावा किया है कि उसने संबंधित भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सरकारी अधिकारियों को इस बाबत मई में सूचना दी थी।

व्हाट्सएप के इस जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए एक अधिकारी ने कहा कि वह संदेश काफी तकनीकी था और कंपनी ने स्पष्ट तौर पर यह नहीं कहा था कि यूजर्स की प्राइवेसी में दखल दिया जा रहा है। जो जानकारी साझा की गई थी वो केवल तकनीकी खामी को लेकर थी। व्हाट्सएप का इस पर कहना है कि मई में यह एक सुरक्षा खामी की तरह नजर आया था लेकिन बाद में इसका संबंध पेगासस से निकला।

दूसरी तरफ जासूसी मामले से चर्चा में आए स्पाइवेयर पेगासस को खरीदने को लेकर इसराइली कंपनी से किसी भी तरह की बातचीत से सरकार ने एक बार फिर साफ इनकार किया है। सरकार के एक उच्च अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि क्या इस घटना को सरकार की तरफ से व्हाट्सएप की जवाबदेही और संदेशों का स्रोत बताने के संबंध में बनाए जा रहे कानून से बचने के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए?

अधिकारी ने कहा कि जासूसी के शिकार लोगों के नामों को देखें तो उनमें अधिकांश ऐसे हैं, जो मौजूदा सरकार के आलोचक हैं। ऐसे में सरकार का कहना है कि क्या यह महज एक संयोग है? सरकार बीते दो साल में भीड़ की हिंसा (लिन्चिंग) और हिंसा की अन्य घटनाओं को लेकर व्हाट्सएप के जरिए फैलाए जा रहे संदेशों पर रोक लगाने के लिए कई बार कंपनी को चेतावनी दे चुकी है। सरकार चाहती है कि व्हाट्सएप जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को ऐसे संदेशों के स्रोत तक पहुंचने में मदद करे। लेकिन व्हाट्सएप हर बार यूजर की निजता की आड़ लेकर ऐसा करने से बचती रही है।

अब आस्ट्रेलिया, अमेरिका और यहां तक कि ब्राजील जैसे देशों से भी व्हाट्सएप पर इस तरह की जानकारी देने का दबाव बन रहा है। इस साल जुलाई और सितंबर में व्हाट्सएप के दो अलग-अलग शीर्ष अधिकारियों ने सरकार के उच्च अधिकारियों से मुलाकात की। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इनमें से किसी भी बैठक में व्हाट्सएप अधिकारियों ने जासूसी संबंधी किसी भी जानकारी का जिक्र तक नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि देश के आईटी अधिनियम की धारा 70 के मुताबिक व्हाट्सएपके लिए ऐसा करना बाध्यकारी है।

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