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दहशत में अफगान के सिख, बोले -पलायन मंजूर लेकिन इस्लाम नहीं

काबुल। अफगानिस्तान के जलालबाद में रविवार को हुए एक आत्मघाती हमले में सिख समुदाय के 13 लोगों की मौत के बाद दहशत में सिख समुदाय के लोग देश छोड़ कर भारत आने पर विचार कर रहे हैं। हमले के पीड़ितों में संसदीय चुनाव में एकमात्र सिख उम्मीदवार अवतार सिंह खालसा और समुदाय के जानेमाने कार्यकर्ता रावल सिंह भी शामिल हैं। इस हमले में अपने चाचा की मौत के बाद तेजवीर सिंह (35) ने कहा अब वे इस बात को लेकर बिल्कुल साफ हैं कि वे अब और यहां नहीं रह सकते। हिन्दू और सिख नेशनल पैनल के सेक्रेटरी तेजवीर सिंह ने आगे कहा “हमारे धार्मिक प्रथाओं के चलते इस्लामिक आतंकी हमें नहीं छोड़ेंगे।

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तेजवीर ने कहा, 'इस्लामिक आतंकी हमारी धार्मिक प्रथाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम अफगानी हैं। सरकार हमें मान्यता देती है लेकिन आतंकवादी हम पर हमले करते हैं कि हम मुस्लिम नहीं हैं।' उन्होंने कहा कि हमें पलायन मंजूर है है लेकिन इस्लाम नही।उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान में सिख समुदाय अब करीब 300 परिवारों तक ही सीमित हो गया है। हमारे पास दो गुरुद्वारे हैं, एक जलालाबाद और दूसरा राजधानी काबुल में है। आपको बता दें कि भले ही अफगानिस्तान मुस्लिम बहुल हो पर यहां 1990 के दशक में गृह युद्ध छिड़ने से पहले तक ढाई लाख से ज्यादा सिख और हिंदू रहते थे।

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एक दशक पहले अमरीकी विदेश विभाग ने एक रिपोर्ट में बताया था कि अफगानिस्तान में करीब 3,000 सिख और हिंदू रहते हैं। राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पूजा-पाठ की स्वतंत्रता के बावजूद आतंकी हमलों और उत्पीड़न से तंग आकर हजारों लोग भारत चले आए। अब जलालाबाद हमले के बाद कुछ सिखों ने शहर स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास से शरण मांगी है।

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