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सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर वरिष्ठ वकील बोले- यह कदम उठाना जरूरी था

नई दिल्लीः देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस जस्टिस जे.चेलमेश्वर के घर में आयोजित की गई। उनके साथ अन्य तीन जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरिन जोसेफ मौजूद थे। वहीं जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सीनियर वकीलों की तरफ से इस पर टिप्पणी आई है।

जानिए कौन क्या बोला

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सीनियर अधिवक्ता माजिद मेमन 
ये बड़ी दुखद बात है कि मीडिया में आकर सुप्रीम कोर्ट के जज चीफ जस्टिस के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं। ये शर्मनाक बात है इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री को अपने संज्ञान में इस बात को लेना चाहिए।

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उज्जवल निकम, वरिष्ठ वकील
"यह न्यायपालिका का काला दिन है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के खराब नतीजे सामने आएंगे. अब से हर आम आदमी न्यायपालिका के हर फैसले को संदेह की नज़रों से देखेगा. हर फैसले पर सवाल उठाए जाएंगे।"
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वरिष्ठा अधिवक्ता केटीएस तुलसी
ये दुखद दिन है। यह सुप्रीम कोर्ट का मामला है, जहां लोगों के विश्वास से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जो इल्जाम लगाए हैं, उसकी जांच होनी चाहिए। ताकि देश और लोगों का विश्वास बना रहे। उन्होंने कहा कि किसी जज के खिलाफ कोई मामला सामने आए तो ऐसे में उस जज को अपने आपको उस मामले से अलग कर लेना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ है तभी तो जज मीडिया के सामने आए हैैं। जजों का ऐसे सामने आना धूप की किरण की तरह है, जिसकी रोशनी के पड़ते ही सारी चीजें छट जाती हैं, ये सुप्रीम कोर्ट के लिए बेहतर भी है।
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प्रशांत भूषण
जिस तरह प्रसाद मेडिकल कॉलेज मामले में जो कुछ मुख्य न्यायाधीश ने किया, जिस तरह उन्होंने ये केस सीनियर जजों से लिया और उससे डील किया और इसे जूनियर जजों को दे दिया गया। ये गंभीर बात ही नहीं थी बल्कि कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन भी था। जिस तरह सीजेआई अपनी ताकत का दुरूपयोग किया, उससे किसी को तो टकराना ही था। जिस तरह ये चारों जज सामने आए ये ऐतिहासिक है तो दुर्भाग्यपूर्ण भी लेकिन ये जरूरी भी था। इसके दूरगामी परिणाम होंगे. इन जजों ने अपना संवैधानिक दायित्व निभाया है।
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सुब्रमण्यम स्वामी
मैं मीडिया से रू-ब-रू होने वाले सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ हूं। स्वामी ने कहा कि  वे जजों की वेदना समझ सकते हैं। उनका दर्द साधारण नहीं रहा होगा तभी उन्हें प्रेस के सामना आना पड़ा। मेरी राय इन चारों जजों के लिए उच्चकोटि की है। स्वामी ने कहा कि अब प्रधानमंत्री को सामने आना चाहिए और इस मामले में दखल देना चाहिए।

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आर. एस. सोढ़ी, रिटायर्ड जज
"मैं यह सब देखकर काफी दुखी हूं। हमारे बीच कई बार मतभेद हुए, लेकिन यह प्रेस के बीच कभी नहीं आया। यह भयावह है, क्या हम सही और गलत के लिए जनमत संग्रह करवाएंगे? वे सभी देश के सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ जज हैं। ये चार या कोई और चार लोकतंत्र को नष्ट नहीं कर सकते। यह अपरिपक्व व्यवहार है। इन चारों पर महाभियोग चलाकर घर भेज देना चाहिए।

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