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भय्यूजी महाराज: सेवक को सौंप गए पैसों के साथ बाकी कामकाज, पत्नी और बेटी के बीच कलह हो सकता है खुदकुशी का कारण

इंदौर। भय्यूजी महाराज! जिसके दर पर बड़े राजनेताओं का सिर झुकता था, जिनके रुतबे की चर्चा देशभर में होती थी, जिन्हें मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने मंत्री का दर्जा दिये जाने का ऑफर दिया वह जिंदगी से हार गये. भय्यूजी अपने इंदौर के खंडवा रोड स्थित आवास पर खुद को रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली. वे अपने पीछे एक सुसाइड नोट के साथ लाखों सवाल छोड़ गये हैं. सवाल का जवाब मध्य प्रदेश पुलिस लगातार तलाशने में जुटी है. हालांकि अब तक की जांच में साफ है कि आत्महत्या की बड़ी वजह घरेलू कलह हो सकती है. इस आशंका का बड़ा आधार भय्यूजी महाराज का सुसाइड नोट है.

सेवक को क्यों सौंपी संपत्ति?
सुसाइड नोट में उन्होंने परिवार को विरासत सौंपने की बजाय सेवक को जिम्मेदारी दी है. डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा के मुताबिक, ''जो सुसाइड नोट मिला है, उसके दूसरे पन्ने में सेवक विनायक का जिक्र है. सुसाइड नोट में लिखा हुआ है कि विनायक ही उनके बाद सारे कामकाज और फाइनेंस देखेगा.'' इसके बाद सवाल उठता है कि भय्यूजी ने अपने अपने परिवार को विरासत सौंपने की बजाय सेवक को क्यों सौंपा? ये सवाल घरेलू कलह की आशंका को और अधिक पुख्ता करता है.

बेटी-पत्नी में थी कलह
बताया जा रहा है कि भय्यूजी महाराज की पत्नी और बेटी कुहू में लंबे समय से अनबन चल रहा था. जिससे भय्यूजी परेशान थे. सुसाइड नोट में भय्यूजी ने तनाव के चलते आत्महत्या करने का जिक्र किया था. कुहू भय्यूजी की पहली पत्नी माधवी की बेटी है. खबर है कि उनकी दूसरी पत्नी आयुषी कुहू को नहीं चाहती थी. कुहू ने सौतेली मां आयुषी पर आरोप लगाया है कि उनकी ही वजह से पिता ने खुदकुशी की है. वहीं आयुषी का कहना है कि कुहू उन्हें पसंद नहीं करती थी इसलिए ऐसी बातें कर रहीं हैं. वे तो गुरुजी के साथ अच्छे से रह रही थीं.

पहली पत्नी माधवी के निधन के बाद पिछले साल 49 वर्ष की उम्र में भय्यूजी ने ग्वालियर की डॉ. आयुषी के साथ दूसरी शादी की थी. कुहू पुणे में पढ़ती थी. इस वजह से महाराज पुणे भी अकसर आया-जाया करते थे.

मौत से पहले एक महिला से क्यों मिले थे भय्यूजी?
भय्यूजी महाराज ने सोमवार इंदौर शहर से 20 किलो मीटर दूर जाकर अपना स्वीट्स रेस्टोरेंट में मुलाकात की थी. कुछ लोगों का मानना है कि महिला स्कूल में एडमीशन की बात करने आयी थी. अब भय्यूजी की मौत के बाद महिला की तलाश है. सवाल है कि वह महिला कौन थी, भय्यूजी ने आखिर 20 किलोमीटर दूर जाकर मुलाकात क्यों की?

आज होगा अंतिम संस्कार
संत और आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज (उदय राव देशमुख) का आज अंतिम संस्कार होगा. उनके पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए इंदौर के सूर्योदय आश्रम में रखा गया है. भय्यूजी को मुखाग्नि उनकी बेटी कुहू देगी. भय्यूजी महाराज के पार्थिव शरीर को आज सुबह सिल्वर स्प्रिंग इलाके में स्थित आवास से सूर्योदय आश्रम ले जाया गया, जहां उनके अनुयायियों की भीड़ उमड़ी हुई है. कतारों में खड़े सैकड़ों लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

मध्य प्रदेश के शाजापुर में 29 अप्रैल, 1968 को जन्मे भय्यूजी महाराज का सभी राजनीतिक दलों में दखल रहा है. उनका कांग्रेस और आरएसएस के लोगों से करीबी रिश्ते हैं. वह समाज के लिए लगातार तरह-तरह के कार्यक्रम चलाते रहे. वेश्याओं के 51 बच्चों को उन्होंने पिता के रूप में अपना नाम दिया था.

भय्यूजी महाराज ने कांग्रेस के शासनकाल में वर्ष 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचकर अन्ना हजारे का अनशन खत्म कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे से भी उनके अच्छे संबंध थे।

 

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