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गोरखपुर में मृतक बच्चों का आंकड़ा 36 पहुंचा, कांग्रेस बोली- 'सरकार की लापरवाही से हुआ हादसा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के बाब राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से पिछले 48 घंटों के दौरान 36 मासूमों की मौत हो गई है. दावा है कि मेडिकल कॉलेज में दो दिन के भीतर तीस बच्चों की मौत की वजह अचानक 10 अगस्त की शाम ऑक्सीजन सप्लाई का रुक जाना है, क्योंकि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का पैसा बकाया था. इस हादसे के बाद विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साध रहा है और उनसे इस्तीफे की मांग कर रहा है.



कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा कि इस योगी सरकार की लापरवाही की वजह से इन बच्चों की मौत हुई है. इसमें डॉक्टर्स का कोई कसूर नहीं है. उन्होंने कहा, ” इस बड़े हादसे के बाद योगी को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.


कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सरकार और पूरा प्रशासन इस घटना के लिए जिम्मेदार है.”


थोड़ी देर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले हैं. प्रशासन का कहना है कि सिर्फ नेताओं को अंदर जाने दिया जाएगा, उनके साथ भीड़ अंदर नहीं जाएगी.


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बबर आज गोरखपुर में बीआरडी कॉलेज का दौरा करेंगे.

 

थोड़ी देर बाद यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन गोरखपुर रवाना होंगे. हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दोनों मंत्रियों की बैठक हुई है. दोनों मंत्री गोरखपुर पहुंच कर सीएम को घटना की पूरी रिपोर्ट देगें.



क्या है पूरा मामला?


दरअसल गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में 10 अगस्त की शाम ऑक्सीजन सप्लाई का रुक गई थी. जिसकी वजह से उसी दिन बच्चों की मौत का आंकड़ा 23 पहुंच गया है और इसके बाद भी 13 मासूम बच्चों की मौत हो गई. बताया गया कि जब अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई रुकी थी और बच्चों की जान सिर्फ एक पंप के सहारे टिकी हुई थी. सूत्रों के मुताबकि, अस्पताल में अभी भी ऑक्सीजन सप्लाई की कमी है.


क्यों हुआ ये हादसा?


बताया जा रहा है कि अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का 66 लाख रुपए से ज्यादा बकाया था. इस मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई का जिम्मा लखनऊ की निजी कंपनी पुष्पा सेल्स का है. तय अनुबंध के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को दस लाख रुपए तक के उधार पर ही ऑक्सीजन मिल सकती थी. एक अगस्त को ही कंपनी ने गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज चिट्ठी लिखकर ये तक कह दिया था, कि अब तो हमें भी ऑक्सीजन मिलना बंद होने वाली है. पैसा चुका दो।