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जम्मू-कश्मीर में Internet की पाबंदी पर SC सख्त, सरकार को दिया यह आदेश

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में Internet और सोशल मीडिया पर जारी प्रतिबंधों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। सर्वोच्च अदालत ने माना कि किसी भी स्थान पर पांच महीनों के लिए Internet बंद करना बहुत सख्त कदम है। इंटरनेट पर रोक तभी लग सकती है जब सुरक्षा को बहुत बड़ा खतरा हो। सरकार अपने आदेशों की समीक्षा करे। यदि सरकार कोई फैसला कर रही है तो इसकी जानकारी लोगों को दी जाना चाहिए। लोगों को असहमति जताने का अधिकार है। सर्वोच्च अदालत ने सरकार से कहा है कि वह अपने आदेशों की सात दिन में समीक्षा करें। इसके बाद जो गैर जरूरी है, उन्हें हटा लें और जो पाबंदियां लगाई जा रही हैं, उनके बारे में अधिसूचना जारी की जाए और लोगों को बताया जाए, ताकि कोई भी उसके खिलाफ चुनौती दे सके।

सुप्रीम कोर्ट ने सबसे बड़ी टिप्पणी यह की कि सरकार का कोई आदेश न्यायीय समीक्षा से परे नहीं है, चाहे वह सुरक्षा के नाम पर ही क्यों न लिया गया हो।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के नाम पर सरकार कोई भी फैसला नहीं ले सकती है। इसके बारे में लोगों को बताया जाना चाहिए। सरकार को अपने सारे फैसले प्रकाशित करने होंगे, ताकि कोई भी उसकी प्रति लेकर कोर्ट में चुनौती दे सके। सिर्फ मौखिक आदेश से काम नहीं चलेगा।

इंटनरेट पर पाबंदी लगाई जा सकती है, लेकिन क्यों और कितने समय के लिए लगाई जा रही है, इसके बारे में जानकारी देना होगी। इंटनरेट पर पाबंदी आर्टिकल 91 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है। पाबंदी लगाना जरूरी है तो कम से कम समय के लिए लगाई जाए।

कोर्ट ने बार-बार धारा 144 लगाने पर आपत्ति ली और कहा कि इसकी समय सीमा और कारण भी बताए जाने चाहिए। इस तरह कोर्ट ने साफ संदेश दिया कि सरकार को सुरक्षा और लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी, दोनों का ख्याल रखते हुए फैसला लेने की जरूरत है।

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