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मानसून सत्र में आएगा दुष्कर्मियों को और कड़ी सजा का बिल, गृह मंत्रालय ने तैयार किया ड्राफ्ट

नई दिल्ली। 12 साल से कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म के मामले में मृत्यु दंड तक का प्रावधान करने वाला क्रिमिनल ला (संशोधित) बिल मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। सत्र 18 जुलाई से शुरू होगा। एक बार संसद की मुहर लगने के बाद बिल क्रिमिनल ला आर्डिनेंस की जगह ले लेगा।

इसकी घोषणा बीती 21 अप्रैल को तब की गई थी जब जम्मू-कश्मीर का कठुआ व उत्तर प्रदेश के उन्नाव दुष्कर्म कांड की गूंज सारे देश में सुनाई दे रही थी। एक अधिकारी का कहना है कि गृह मंत्रालय ने ड्राफ्ट बिल तैयार कर लिया है और जल्द इसे कैबिनेट से मंजूरी मिल जाएगी। बिल में कड़ी सजा का प्रावधान है।

महिला से दुष्कर्म करने पर सात से 10 साल की सजा इसमें रखी गई है। अधिकतम सजा उम्र कैद की है। ड्राफ्ट बिल के अनुसार 16 साल से कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म करने पर सजा 10 साल के बढ़ाकर 20 साल की गई है। इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास भी किया जा सकता है। 16 से कम उम्र की लड़की से सामूहिक दुष्कर्म करने पर आजीवन कारावास या फिर फांसी की सजा का प्रावधान रखा गया है।

बिल में इस तरह के मामलों की जांच तेजी से करने की बात भी कही गई है। इसे अनिवार्य तौर पर दो माह में पूरा करना होगा। ट्रायल भी दो माह के भीतर पूरा करना होगा। अपील के निस्तारण का समय छह माह तय किया गया है। 16 साल से कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म या फिर सामूहिक दुष्कर्म करने पर अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी।

कानून मंत्रालय ने तैयार किया स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ड्राफ्ट बिल-

कानून मंत्रालय ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ड्राफ्ट बिल तैयार किया है। इससे देश भर में विशेष अदालतें बनाई जाएंगी जो दुष्कर्म मामलों की तेजी से सुनवाई करेंगी। गृह सचिव से बात के बाद कानून मंत्रालय ने बिल तैयार किया है। 14 जून को कैबिनेट सचिव को सूचना दी गई थी कि बिल तैयार है।

यह योजना उस बिल का ही एक हिस्सा है जिसके जरिये 12 साल से कम उम्र की लड़की के साथ दुष्कर्म करने पर फांसी तक की सजा का प्रावधान किया गया है। यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा।