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धार- भगोरिया पर्व की हुई शुरुआत, ड्रेस कोड में आभूषणों से लदी ऱ्ही युवतियां

धार-डही। भीड़ और आदिवासी संस्कृति के लिहाज से जिले का सबसे बड़ा डही का भगोरिया उम्मीद से बेहतर रहा। दोपहर बाद परवान चढ़े भगोरिया में नगर के छह अलग-अलग स्थानों पर मजमा जमा। सबसे अधिक भीड़ झूले-चकरी वाले स्थान पुलिस थाना मैदान पर रही। यहां क्षेत्र के 62 गांव के आदिवासी ग्रामीण शामिल हुए डही में गुरुवार को जिले का सबसे प्रमुख भगोरिया में उत्साह और उल्लास चरम पर रहा। ड्रेस कोड में आभूषणों से लदी युवतियां तो बांसुरी पर तान छेड़ते युवा आकर्षण का केंद्र रहे। इस बार युवाओं के कई समूह भी ड्रेस कोड में आए थे। युवतियों की रंग बिरंगी पोशाकों से उठने वाली नाजनीन इत्र की खुशबू ने बाजार और आयोजन स्थलों को तीखी गंध से महका कर रख दिया। सजी-धजी बालाएं गुलाल से बचने के लिए जहां युवकों को देख मुंह घूंघट की ओट में छुपाती रही। वहीं कुछ युवतियों के समूह भीड़-भाड़ में धक्का-मुक्की से बचने के लिए मकानों की छतों और ओटलो आदि पर दूर बैठे आते- जाते समूहों की भगोरिया की मस्ती को देखती रही। महिला तथा युवतियों व बच्चों ने चुस्कियों (कुल्फी) का खूब लुत्फ उठाया। तीर कमान और अन्य श्रृंगारित सामग्री हाथों में लिए अन्य युवकों के समूहों ने भी अपना अलग नृत्य कर समा बांधा। दर्जनों ढोल की थाप लगी तो बांसुरिया पर तान छिड़ी। इन्हें निहारते लोग भी आनंदित हो उठे।

पुलिस थाना मैदान पर लगे झूलों में युवक-युवतियों और बच्चों ने झूला झूल कर लुत्फ उठाया साथ ही मौत का कुआं देखकर रोमांचित हो उठे। मेले में नारियल, हार कंगन, खजूर, चने, खारे भजियों की भी बिक्री हुई। फोटोग्राफरों की दुकानों पर फोटों खिंचवाने के लिए तांता लगा रहा। चश्में, रुमाल और खिलौनों की भी खरीदारी खूब हुई। हालांकि पहला भहोरिया था ऐसे में व्यापार मन मुताबिक नहीं होने की व्यापारियों ने बात कही। यहां के मशहूर भगोरिया पर लोकसभा चुनाव आचार संहिता का विशेष प्रभाव रहा। प्रशासन द्वारा पहले ही तय कर दिया गया था कि गैर निकालने और डीजे वाहन लाने के लिए पूर्व अनुमति जरुरी होगी। साथ ही कई और भी बाते थी जो आचार संहिता के दायरे में आ रही थी। ऐसे में यहां किसी राजनैतिक दल की कोई गैर नहीं निकली। 

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