Follow us:

फेसबुक यूजर्स को बताएगा आज से- डाटा चोरी हुआ या नहीं, ऐसे करें पता

वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क। डेटा लीक मामले में लगातार फजीहत झेल रहा फेसबुक अब यूजर्स को बताएगा कि आपका डाटा चोरी हुआ था या नहीं। इनमें भारत के 5,62,455 यूजर्स भी शामिल हैं। डाटा चोरी होने या नहीं होने की जानकारी आपको मंगलवार से संदेश के जरिए मिलेगी। कैंब्रिज एनालिटिका स्कैंडल में चोरी हुए फेसबुक डेटा की अब पूरी जानकारी दी जाएगी। जिन 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा चोरी हुआ है उन्हें इस बारे में संदेश मिलेगा। इनमें भारत के 562,455 उपभोक्ता भी शामिल हैं।

फेसबुक ने दावा किया है कि जिन यूजर्स का डेटा चोरी हुआ है उनमें भारत के उपभोक्ता सिर्फ 0.6 फीसदी हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि भारत में लगभग 20 करोड़ फेसबुक यूजर्स हैं। इनमें से एप डाउनलोड करने के बाद सिर्फ 335 लोग ही 'सीधे तौर' पर प्रभावित हुए हैं, जबकि 562,120 लोग 'संभावित रूप' से प्रभावित थे।

फेसबुक का कहना है की इस घटना में जो लोग प्रभावित हुए हैं उनमें से सात करोड़ से अधिक यूजर्स अमेरिका से हैं। इसके अलावा फिलीपींस, इंडोनेशिया और ब्रिटेन में एक-एक करोड़ यूजर्स का डेटा चोरी हुआ है। इसी के साथ ही 220 करोड़ यानी 2.2 अरब फेसबुक यूजर्स को नोटिस मिलेगा।

इस नोटिस का शीर्षक 'प्रोटेक्टिंग योर इन्फॉर्मेशन' होगा। इसके साथ एक लिंक भी दिया जाएगा। इस लिक में जानकारी होगी कि वे किन एप्स का प्रयोग करते हैं और किन एप्स के साथ उन्होंने अपनी जानकारी शेयर की है। इसके बाद अगर यूजर्स चाहें तो हर एक एप को बंद कर सकते हैं या थर्ड-पार्टी एक्सेस को पूरी तरह से बंद भी कर सकते हैं।

अब तक के डेटा चोरी के सभी मामलों में फेसबुक का मामला सबसे बड़ा रहा है। आरोप है कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए इसे अंजाम दिया गया है। इस मामले में फेसबुक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग पहले ही माफी मांग चुके हैं। इसके बाद फेसबुक ने अपने सुरक्षा मानकों में भी बदलाव किए हैं।

आज सीनेट के सामने पेश होंगे मार्क जुकरबर्ग

उधर, इस मामले में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस हफ्ते वह अमेरिका के सांसदों के सामने पेश होंगे। अमेरिकी सीनेट के सामने उनकी पेशी मंगलवार को होगी। कहा जा रहा है कि डेटा चोरी की घटना के बाद सांसद फेसबुक समेत अन्य ऑनलाइन सेवाओं पर सख्ती करने के मूड में हैं। सांसदों का कहना है कि अमेरिका के लोगों की निजता और सम्मान बचाने के लिए कैंब्रिज एनालिटिका जैसी कंपनियों पर सख्ती बेहद जरूरी है।