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धार में मुनिश्री अरह सागर जी ने किए भोजशाला दर्शन

धार। दिगम्बर जैन संत मुनिश्री अरह सागर जी मसा ने ऐतिहासिक इमारत भोजशाला में मंगलवार को दर्शन समाजजनों के साथ किए। मुनिश्री अरह सागरजी ने भोजशाला के एक-एक बिंदूवार अवलोकन कर जानकारी प्राप्त की। उन्हें बताया कि जैन धर्म का प्रसिद्ध जन कल्याणकारी भक्तामर काव्य की चना इसी स्थान पर मुनि मानतुंगाचार्य ने की थी। संक्षिप्त में किवदंति भी बताई कि मुनि मानतुंगाचार्य  ने भक्तामर काव्य की जैसे-जैसे एक-एक काव्य  की रचना करते गए वैसे-वैसे उनके बंदीगृह के 48 ताले अपने आप टूटकर बिखर गए।
मुनिश्री ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह मुनि मानतुंगाचार्य की जीत नहीं बल्कि उनकी साधना की जीत है। आज उनकी यह साधना जनकल्याण की साधन बन गई है। जैन धर्म में इस काव्य का वाचन बड़ी श्रद्धा के साथ किया जाता है। इस काव्य को हर संत नमन ही नहीं करते बल्कि वे जन-जन के कल्याण का इसे माध्यम बताते है। मीडिया प्रभारी सुभाष जैन ने बताया कि मुनिश्री अरह सागर समाजजनों के साथ जैसे ही भोजशाला पहुंचे वहां पर जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष विमल गोधा व समाज अध्यक्ष वीरेन्द्र जैन आदि ने उनका अभिनंदन किया। मुनिश्री ने भोजशाला की मुक्ति की कामना की। समाजजनों ने सामूहिक रूप से भक्तामर पाठ का वाचन भी किया।