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धार में 4 साल के बच्चे के आॅपरेशन के लिए चक्कर लगा रहे पिता से मांगे डॉक्टर ने रुपए, हिंदू नेता पहुंचे, जमकर हुई बहस, सीएम हेल्पलाईन पर दर्ज करवाई शिकायत

धार। अस्पताल में रुपए देने के बाद ही काम होता है, कई एजेंट पूरे अस्पताल में सक्रिय है। आपको इस ध्यान देना जरुरी हो गया है। अस्पताल में यह हालात बन गए है, आप कर्मचारियों का ईलाज कर दे, वरना हमें भी ईलाज करते आता है। उक्त बातें आज जिला अस्पताल में सिविल सर्जन से हिंदू नेता व उनके स‍ाथियों ने कही। वहीं बगैर आवेदन के अवकाश पर जाने का मामला भी सामने आया, हिंदू नेता जिस दौरान बात कर रहे थे। उसी दौरान तीन से चार अन्य मरीज परेशान होकर सिविल सर्जन के कक्ष में पहुंचे। पिछले 12 दिनों से 4 साल के मासूम बच्चे के पैर की हड्डी टूटने के बाद आॅपरेशन के लिए परेशान पिता से सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने पांच हजार रुपए मांगे हैं। पैसे मांगने का मामला सामने आने के बाद हिन्दू नेता गोपाल शर्मा, महेश अग्रवाल व अन्य ने सिविल सर्जन डॉ खरे को शिकायत की। शिकायत के दौरान जब डॉक्टर को सामने बुलाने की बात आई तो पता चला कि चिकित्सक ने सीएल (अवकाश) ले रखा है। यहां पर सीएल का आवेदन मांगा गया तो आवेदन नहीं दिखाया। वहीं पैसे मांगने वाले डॉक्टर अस्पताल में मरीज देखने के लिए राऊंड पर मिला। इसबात पर सभी नेता आक्रोषित हो गए व करीब दो घंटे तक जमकर बहस कक्ष में हुई।

पहले 2 हजार मांगे फिर 5 हजार पर आ गए

26 दिसंबर को टांडा निवासी केरू बघेल जो पेशे से मजदूर है। अपने बेटे को लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचा था। गिरने से चार वर्षीय बेटे अमित के पैरों की हड्डी टूट गई है। प्राथमिक उपचार में डॉक्टरों ने पैर पर पट्टा बांध दिया, लेकिन साथ ही आॅपरेशन की बात कही थी। पिछले 12 दिनों से केरू डॉक्टर से आॅपरेशन करने के लिए कह रहा है। उसे हर बार एनिस्थियां डॉक्टर तो कभी अन्य बहाना बनाकर टाला जा रहा है। हैरान करने वाली बात है कि उसका इलाज हड्डी के डॉक्टर महेश बौरासी के द्वारा किया जा रहा है, लेकिन पैसे की मांग अन्य चिकित्सक डॉक्टर जितेन्द्र द्वारा की गई है। पहले 2 हजार रुपए मांगे गए। उसने 500 की व्यवस्था की तो आॅपरेशन का मामला अटका दिया। केरू की माली हालत खराब है। इसके चलते उसने धार निवासी महेश भाई से पैसे उधार मांगे थे। इधर आॅपरेशन के लिए पैसे की मांग की जा रही है। दूसरी और मरीज को परेशान करने के लिए उसे इंदौर रैफर किए जाने की बात भी कही गई थी। मामला सामने आने के बाद डॉक्टरों ने मंगलवार को बच्चे के आॅपरेशन की बात कही।

सिविल सर्जन से लिखवाया पत्र

सोमवार को हिन्दू नेताओं के अस्पताल पहुंचने के बाद कोतवाली प्रभारी सुबोध श्रोत्रिय भी अस्पताल पहुंच गए। पुलिस की मौजूदगी में मरीज के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर सिविल सर्जन से सवाल किए गए। संघ नेताओं ने कहा कि दलित आंदोलन इसी प्रकार के शोषण से शुरु होते हैं। सरकारी अस्पताल में पैसा नहीं लगता है। पैसा मांगते है तो सरकार की भी बदनामी होती है। इधर सीएल पर गए डॉक्टर का आवेदन नहीं मिलने के पश्चात हिन्दू नेताओं ने सिविल सर्जन से ही हस्तलिखित पत्र लिया। इस पत्र में सिविल सर्जन डॉ खरे ने लिखकर दिया है कि बगैर आवेदन सीएल मंजूर की गई है।

मोबाईल पर फोटो दिखाया, कक्ष में बैठे पर नहीं दी दवाई

हंगामे के दौरान अस्पताल में कर्मचारियों के दुर्व्यवहार को लेकर कई शिकायतें भी आई। श्रीराम नाम के युवक ने मौके पर मोबाईल में फोटो दिखाकर कहा कि 1 बजे पर्ची से दवाई लेने के लिए वितरण कक्ष में गया था। यहां से उसे 5 बजे आने के लिए कहा गया है, जबकि कक्ष खुला था और कर्मचारी आपस में बात कर रहे थे। युवक का कहना था कि एक्सीडेंट का केस था। दवाई उसके मरीजों की थी। समय पर पहुंचा यदि पांच मिनट लेट भी पहुंचता तो कक्ष खुला होने के कारण उसे दवाई मिलना चाहिए थी। सिविल सर्जन के हस्तक्षेप के बाद युवक को दवाइयां दी गई। 

सीएम हेल्पलाईन पर दर्ज करवाई शिकायत

कक्ष से ही सीएम हेल्पाईन पर शिकायत दर्ज करवाई गई, जिसमें दो डॉक्टरों द्वारा रुपए मांगने तथा बेहतर ईलाज नहीं मिलने की बात कही है। साथ ही सिविल सर्जन, सीएमएचओ सहित अन्य अधिकारियों को एक शिकायती पत्र भी सौंपा गया है।