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धार- कोर्ट ने निःशक्त नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को सश्रम कारावास की सजा सुनाई

धार-मनावर। मानसिक रूप से निःशक्त 17 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर के जैन द्वारा 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5-5 हजार रूपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई। घटना अनुसार 6 फरवरी 2016 के चार पांच माह पूर्व ग्राम खंडलाई थाना मनावर की रहने वाली नाबालिग पीड़िता जो मानसिक रुप से निःशक्त हैं उक्त बालिका के साथ उसकी इच्छा व सहमति के विरुद्ध ग्राम के ही रुमलिया उर्फ रमलिया उम्र 42 वर्ष ने बलात्संग किया। आरोपी के इस कृत्य से नाबालिग पीड़िता गर्भवती हो गई। प्रकरण में आरोपी के विरुद्ध अपराध धारा 376, 376(2)(1) भादवि एवं धारा 5/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण 2012 में मामला पंजिबद्ध किया गया। प्रकरण का अनुसंधान उपनिरीक्षक ज्योती पटेल व उपनिरीक्षक कोमलसिंह सोनी द्वारा किया गया। प्रकरण विचारण हेतु अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर के जैन के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन की ओर से 12 साक्षियों के न्यायालय में कथन करवाए गए।

गर्भ की असमय डिलीवरी के दौरान मृत्यु 

घटना के बाद बालिका गर्भवती हो गई, उसके पेट में 4-5 माह का गर्भ था, उक्त गर्भ की असमय डिलीवरी के दौरान मृत्यु हो गई। न्यायाधीश आर के जैन द्वारा आरोपी रूमलिया पिता मालिया निवासी ग्राम खंडलाई को अवयस्क पीडिता के साथ जबरन बलात्संग के आरोप में दोषी पाते हुए अपराध धारा 376, 376(2)(1) धारा भादवि में 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया एवं धारा 5 (जे)(2) सहपठीत धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम पोस्को एक्ट में 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5 हजार रूपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई एवं अर्थदण्ड की राशि 10 हजार रूपये पीडिता को दिलाई जाने का आदेश दिया गया। प्रकरण में शासन की और से पैरवी शरद कुमार पुरोहित शासकीय लोक अभियोजक द्वारा की गई।