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नेहरू को ‘अपराधी’ बताने वाले शिवराज पर दिग्विजय का पलटवार, कहा- आप उनके पैरों की धूल भी नहीं

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाये जाने के बाद मध्य प्रदेश के दो सीनियर नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है. कश्मीर मामले पर मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को 'अपराधी' कहा तो अब इसको लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने उनपर निशाना साधा है.

दिग्विजय सिंह ने शिवराज सिंह पर पलटवार करते हुए कहा, ''नेहरू के पैरों की धूल भी नहीं हैं शिवराज. शर्म आनी चाहिए उनको.'' इसके आगे उन्होंने कश्मीर पर बोलते हुए कहा,'' सरकार ने आर्टिकल 370 हटाकर अपने हाथ आग से जला लिया है. कश्मीर को बचाना हमारी प्राथमिकता है. मैं मोदी जी, अमित साह जी और अजित डोभाल जी से अपील करता हूं कि सावधान रहें वरना हम कश्मीर खो देंगे.''

ANI
@ANI
Digvijaya Singh, Congress on BJP leader Shivraj Singh Chouhan's remark "Nehru was a criminal": Nehru ji ke pairon ki dhool bhi nahi hain Shivraj, sharam aani chahiye unko. (11.8.19)

दिग्विजय के अलावा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा है. कमलनाथ ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, जिन्हें आधुनिक भारत का निर्माता, कहा जाता है. जिन्होंने आज़ादी के लिए संघर्ष किया, जिनके किए गए कार्य व देशहित में उनका योगदान अविस्मरणीय है. उनको मृत्यु के 55 वर्ष पश्चात आज अपराधी कह कर संबोधित करना बेहद आपत्तिजनक व निंदनीय है.''

Office Of Kamal Nath
@OfficeOfKNath
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहरलाल नेहरू जिन्हें आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है,जिन्होंने आज़ादी के लिये संघर्ष किया,जिनके किये गये कार्य व देश हित में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

उनको मृत्यु के 55 वर्ष पश्चात् आज अपराधी कह कर संबोधित करना,बेहद आपत्तिजनक व निंदनीय है।

बता दें कि शनिवार को ओडिशा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिवराज सिंह चौहान ने कहा था,'' जब भारतीय सेना कश्मीर में पाकिस्तानी कबायलियों को खदेड़ रही थी तभी नेहरू ने संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया. इसी वजह से कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया. अगर ऐसा नहीं होता तो पूरा कश्मीर भारत का होता.'' इसके आगे उन्होंने कहा,'' “जवाहर लाल नेहरू का दूसरा अपराध अनुच्छेद 370 था. भला एक देश में कैसे दो निशान, दो विधान (संविधान) और दो प्रधान अस्तित्व में हो सकते हैं? यह केवल देश के साथ अन्याय नहीं बल्कि अपराध भी है.”

 

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