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Facebook ने Congress ही नहीं, BJP से जुड़े 15 अकाउंट्स भी हटाए

नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर लोगों को गुमराह होने से बचाने के लिए फेसबुक ने बड़ा कदम उठाया है। फेसबुक ने कांग्रेस की आईटी सेल से जुड़े ऐसे 687 पेज व अकाउंट को हटा दिया है, जिनकी पहचान संदिग्ध थी। इन्हें संचालित करने वाले लोग पहचान छुपाकर लोगों को गुमराह कर रहे थे। इनके अलावा फेसबुक ने भाजपा का समर्थन करने वाली आईटी फर्म सिल्वर टच से जुड़े 15 पेज, ग्रुप व अकाउंट हटाने की बात भी कही है। इनमें भी संचालित करने वालों ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी। यह कंपनी नमो ऐप का सहारा लेकर भाजपा का प्रमोशन करती थी।

इन सभी को को-ऑर्डिनेटेड इनऑथेंटिक बिहेवियर का दोषी पाया गया। फेसबुक में साइबर सेक्योरिटी पॉलिसी प्रमुख नाथनियल ग्लीचर ने बताया कि जिन पेज को हटाया गया है, उनमें से ज्यादातर को फेसबुक के ऑटोमेटेड सिस्टम ने पहले ही पहचान कर सस्पेंड कर दिया था।

उन्होंने बताया, 'हमने इन्हें हटा दिया, क्योंकि इन्हें संचालित करने वाले लोग फर्जी अकाउंट के जरिये अपनी पहचान छिपा रहे थे। हम लगातार को-ऑर्डिनेटेड इनऑथेंटिक बिहेवियर में लिप्त अकाउंट और पेज की पहचान काम कर रहे हैं, क्योंकि हम नहीं चाहते कि हमारे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने के लिए हो।'

ग्लीचर ने बताया कि इन पेज और अकाउंट से स्थानीय खबरों और राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी पोस्ट की जाती थी। उम्मीदवारों व कांग्रेस पार्टी के विचार तथा भाजपा की आलोचना वाली पोस्ट भी इनसे बहुतायत में की जाती थी। जांच करने पर इनका संबंध कांग्रेस आइटी सेल से जुड़े लोगों से पाया गया।

क्या है को-ऑर्डिनेटेड इनऑथेंटिक बिहेवियर?

कुछ पेज या अकाउंट द्वारा मिलकर एक-दूसरे की पहचान छिपाने की कोशिश को को-ऑर्डिनेटेड इनऑथेंटिक बिहेवियर कहा जाता है। सभी पेज या अकाउंट मिलकर लोगों को गुमराह करते हैं। ऐसा होने से इनकी पोस्ट देख रहे यूजर को यह अंदाजा नहीं लग पाता है कि पेज या अकाउंट को संचालित कौन कर रहा है। माना जाता है कि राजनीतिक दल अपने विरोधी दल के लोगों की पहचान चुराकर ऐसे पेज बनाते हैं और फिर उसके समर्थकों को गुमराह करते हैं।

विज्ञापन पर भी करते थे खर्च

फेसबुक ने बताया कि कांग्रेस के आइटी सेल से जुड़े जिन पेज व अकाउंट को हटाया गया है, उनकी ओर से फेसबुक पर विज्ञापन भी दिया जाता था। पहला विज्ञापन अगस्त, 2014 में और आखिरी विज्ञापन मार्च, 2019 में दिया गया था। इन विज्ञापन पर कुल 39,000 डॉलर (करीब 27 लाख रुपये) का खर्च किया गया था।

भुगतान भारतीय रुपये में हुआ था। वहीं, भाजपा समर्थक पेज व अकाउंट से विज्ञापन पर कुल 70,000 डॉलर (करीब 48 लाख रुपये) का खर्च किया गया था। इन पर पहला विज्ञापन जून, 2014 में और आखिरी विज्ञापन फरवरी, 2019 में किया गया था।

कोई आधिकारिक पेज नहीं हटा

कांग्रेस फेसबुक की ओर से कांग्रेस आइटी सेल से जुड़े 687 पेज व अकाउंट हटाए जाने पर पार्टी ने सफाई दी है। कांग्रेस ने ट्वीट करके कहा है कि उसका कोई भी आधिकारिक पेज नहीं हटाया गया है। साथ ही पार्टी के विभिन्न वेरिफाइड वॉलेंटियर द्वारा संचालित कोई पेज भी प्रभावित नहीं हुआ है। पार्टी ने फेसबुक से उन पेज और अकाउंट की सूची भी मांगी है, जिन्हें हटाया गया है।

चुनाव आयोग के निर्देश

- नामांकन दाखिल करने के दौरान उम्मीदवारों को सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी।

- सोशल मीडिया पर सभी राजनीतिक विज्ञापनों का प्री-सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा।

- चुनाव आयोग ने गूगल, फेसबुक, ट्विटर और यू-ट्यूब को राजनीतिक दलों के विज्ञापनों को वेरिफाई करने को कहा है।

- सोशल मीडिया पर विज्ञापनों पर खर्च को चुनावी खर्च का हिस्सा माना जाएगा।