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भाई दूज : जानें भाई-बहन के इस पर्व का मुहूर्त और इसका महत्व

नई दिल्ली। दीपावली का पांचवा और अंतिम पर्व है भाई दूज (Bhai Dooj). यह पर्व चित्रपुप्त पूजा का भी होता है. चित्रगुप्त का जन्म ब्रह्मा जी के काया से हुआ है. कायस्थों के आराध्य हैं चित्रगुप्त. कार्यस्थ का अर्थ जो हर काम में सक्षम हो. चित्रगुप्त जी सृष्टि के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रहते हैं. धर्मराज को न्याय करने में सहयोग करते हैं. भैया दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है. यम देवता ने अपनी बहन यमुना को भाई दूज के दिन दर्शन दिए थे. यम देवता ने प्रसन्न होकर अपनी बहन को वरदान दिया. भाई और बहन एक साथ यमुना में स्नान करेंगे तो मोक्ष की प्राप्ति होगी. भारतीय संस्कृति में मोक्ष का बड़ा महत्व है. इसी वजह से यमुना में भाई-बहन स्नान करते हैं. संस्कृति को जीवित रखना है तो नदियों को जीवित रखना होगा.

इस दिन भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाते हैं. बहनों रोली और अक्षत से भाई का तिलक करती हैं. बहनें अपने भाई के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं. भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं

भाई दूज के दिन तिलक का समय क्या है?

भाई दूज के शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 9 मिनट से लेकर दोपहर में 3 बजकर 17 मिनट तक है. तिलक सही समय पर करें. बहुत से लोग तिलक को महत्व नहीं देते हैं. कई बार भाई दूज में बहुत देर कर देते हैं. भाई दूज के दिन द्वितीया तिथि में ही तिलक होना चाहिए. तिलक शुभ मुहूर्त में करें. भाई दूज का सामान्य तिलक नहीं है. तिलक के दौरान हंसी-मजाक ना करें. बहुत गंभीर होकर ऊर्जा को ग्रहण करने की कोशिश करें. बहन के मन के भाव आपके लिए रक्षा कवच बन जाएंगे. एकाग्रचित होकर ऊर्जा ग्रहण करें

आजकल रिश्ते कमजोर हो रहे हैं. सोशल मीडिया के जरिए बधाई ना दें. जिनका मंगल और बुध ग्रह खराब होता है, उनका रिश्ता बहुत खराब होते हैं. जिनके घर में पितृ दोष होता है, उनके घर में रिश्ते मुश्किल से निभते हैं. घर में पितृ दोष का समाधान करें. मंगल और बुध का भी समाधान करें.

आज का ये है शुभ समय

दू मुहूर्त है सुबह 8 बजकर 51 मिनट से लेकर 9 बजकर 34 मिनट तक

दोपहर में 12.26 बजे लेकर 01.09 बजे तक

गुलिक काल सुबह 8 बजकर 3 मिनट से लेकर 9 बजकर 23 मिनट तक

यमगण काल दोपहर में 2 बजकर 45 मिनट से लेकर 4 बजकर 6 मिनट तक

राहुकाल सुबह 10 बजकर 44 मिनट से लेकर 12 बजकर 04 मिनट तक

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 43 मिनट से लेकर 12 बजकर 26 मिनट तक

अमृत काल सुबह 9 बजकर 51 मिनट से लेकर 11 बजकर 30 मिनट तक

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