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अनुच्छेद 370 हटाने पर बोले अमित शाह, इसको पहले ही खत्म हो जाना था

चेन्नई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के अपने फैसले पर रविवार को बयान देते हुए कहा कि मुझे लगता है कि इसको पहले ही खत्म कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान ये बात कही। शाह ने आगे कहा कि गृह मंत्री के रूप में अनुच्छेद 370 को हटाने के परिणामों को लेकर मेरे मन में कोई भ्रम नहीं था। मुझे विश्वास है कि कश्मीर में आतंकवाद खत्म हो जाएगा और यह अब विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि बिल लाते वक्त मेरे मन में कुछ आशंकाएं थी। , क्योंकि राज्यसभा में पार्टी बहुमत में नहीं है। इसी वजह से इस बिल को हमने पहले राज्यसभा में पेश किया।दरअसल, शाह चेन्नई में राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू की जिंदगी पर एक किताब 'Listening, Learning and Leading' का विमोचन करने के लिए एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आए हुए है।

गौरतलब है 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर पर ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अमित शाह ने राज्यसभा में राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A को हटाने की पेशकश की थी। यहां से मंजूरी मिलने के बाद इसको लोकसभा में पेश किया गया था।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बोलते हुए कहा था कि धारा 370 कश्मीर को भारत से जोड़ती नहीं बल्कि जोड़ने से रोकती है। यहां मौजूद एक दो लोगों के अलावा किसी ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध नहीं किया। वो भी चाहते हैं कि 370 हट जाए, लेकिन उनके सामने वोटबैंक का प्रश्न आकर खड़ा हो जाता है।

लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकल्प पेश करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रपति की घोषणा है कि उनके आदेश के बाद अनुच्छेद-370 के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होंगे। राज्यसभा के बाद इस विधेयक को लोकसभा में लाया गया है। जम्‍मू-कश्‍मीर का मसला राजनीतिक नहीं है। यह कानूनी विषय है। भारत के संविधान में बहुत साफ है कि जम्‍मू-कश्‍मीर भारत का अभिन्न अंग है। जम्मू कश्मीर में संविधान के अनुच्‍छेद-1 के सारे अनुच्छेद लागू हैं। इसके मुताबिक भारत सभी राज्यों का संघ है।

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