Follow us:

RDVV दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को दिए मेडल

जबलपुर। मध्यप्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल गुरुवार को रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। उन्होंने समारोह में विद्यार्थियों को 42 गोल्ड मैडल और 123 पीएचडी व 1 डीलिट की उपाधि प्रदान की गई। दीक्षांत में होने वाले क्रम में पहले पीएचडी शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। इसके बाद स्वर्णपदक धारकों को मैडल व प्रमाण पत्र दिए गए।

स्कूल में पढ़ाकर की घर में मदद

नाम- पूजा ज्योतिषी

पदक- 10 स्वर्ण पदक

विषय- इकोनॉमिक्स

प्रतिशत- 84.86

स्थान- मंडला

पैरेन्ट्स- सुशीला-अवधेश ज्योतिषी

मेरी बात- मेरे पिता पंडिताई करते हैं और मां गृहिणी हैं। हम बच्चे अच्छे से पढ़ सकें इसलिए मां बचपन में ही गांव मंडला ले आईं थी। पिताजी पंडिताई करके हम लोगों के पास पैसे भेजते थे। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। काफी संघर्ष के साथ पढ़ाई हुई है। 12वीं क्लास के बाद ही मैंने स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया था जिससे घर पर मदद कर सकूं। अभी भी पढ़ा रही हूं। आगे प्रोफेसर बनना चाहती हूं।

बनना है कार्डियोलॉजिस्ट

नाम- डॉ. लक्ष्मी मोहनानी

पदक- 5 स्वर्ण पदक

विषय- एमबीबीएस

प्रतिशत- 78

स्थान- सिवनी से हैं

मेरी बात- मैंने जबलपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है। अब भोपाल से एमडी कर रही हूं। आगे चलकर कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती हूं।

जाना है रिसर्च फील्ड में

नाम- आयुषी मेराल

पदक- 4 स्वर्ण पदक

विषय- माइक्रोबायोलॉजी

प्रतिशत- 83 प्रतिशत

स्थान- सिवनी

पैरेन्ट्स- उषा- शिरीष मेराल

मेरी बात- मेरे पिता डॉक्टर हैं तो घर पर साइंस का माहौल पहले से ही है। मैंने रिवीजन और नोट्स बनाकर पढ़ने में ज्यादा ध्यान दिया। मैं आगे चलकर रिसर्च की फील्ड में जाना चाहती हूं।

36 सालों के बाद शुरू की पढ़ाई और 60वें जन्मदिन पर मिलेगा स्वर्ण पदक

नाम- शिप्रा सेन

पदक- 1 स्वर्ण पदक

विषय- एमए रूरल डेवलपमेंट

पति- कर्नल पीके सेन

मेरी बात- मेरी शादी 21 वर्ष की उम्र में हो गई थी। उस समय बीएससी किया था। शादी के बाद पढ़ाई छूट गई थी। दो बच्चे हो गए तो बच्चों और परिवार में व्यस्त रही। पति भी आर्मी में थे तो अलग-अलग जगह पोस्टिंग रही। अब पति रिटायर्ड हो गए हैं। बेटा मेजर है। दामाद कर्नल हैं तो सोचा कि अब फिर से पढ़ाई शुरू की जाए। 36 साल बाद पढ़ाई शुरू की और मेरे 60वें जन्मदिन पर मुझे स्वर्ण पदक मिल रहा है। जो मेरे जीवन का यादगार दिन है।

 

सिलाई का काम करके निकाला खर्च

नाम- ज्योति सनोरिया

पदक- 3 स्वर्ण पदक

विषय- एलएलबी

प्रतिशत- 70 प्रतिशत

पैरेन्ट्स- आशा व स्वर्गीय अर्जुन सिंह सनोरिया

स्थान- सिवनी की रहने वाली

मेरी बात- मेरे पिता का निधन जब हम बहुत छोटे थे तभी हो गया। आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। घर वालों ने बहुत जल्दी शादी कर दी थी। फर्स्ट ईयर में थी तब शादी हुई थी। पहले सिलाई करके मैंने घर पर मदद की है। स्ट्रगल तो बहुत था लेकिन अब 3 स्वर्ण पदक मिलने पर लग रहा है कि मेहनत सफल रही।