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जस्टिस नरेंद्र कुमार जैन होंगे मप्र मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष

भोपाल। राज्य मानव अधिकार आयोग में आठ साल से खाली पूर्णकालिक अध्यक्ष पद पर जस्टिस नरेंद्र कुमार जैन नियुक्त होंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा के कक्ष में हुई बैठक में इस पर सहमति बनी।

हालांकि इसमें समिति के सदस्य नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह अस्वस्थता के चलते शामिल नहीं हो सके। बताया जा रहा है कि एक-दो दिन में नियुक्ति आदेश जारी हो सकते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जस्टिस जैन को मप्र मानव अधिकार आयोग का अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनने की पुष्टि की है।

राज्य मानव अधिकार आयोग में आखिरी पूर्णकालिक अध्यक्ष जस्टिस डीएम धर्माधिकारी थे। वर्ष 2010 में कार्यकाल पूरा होने के बाद से कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर व्यवस्था को चलाया जा रहा था। इसको लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर हुई और कोर्ट ने सरकार को कई बार नियुक्ति नहीं होने को लेकर फटकार भी लगाई।

इसके मद्देनजर सरकार ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार से नियुक्ति के लिए पैनल मांगी। इसको लेकर फरवरी 2018 में विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में समिति की बैठक हुई थी पर गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह इसमें मुंगावली विधानसभा सीट के उपचुनाव की व्यस्तता की वजह से शामिल नहीं हो पाए थे और कोई फैसला नहीं हो सका। तब जस्टिस अजीत कुमार सिंह का नाम तय होने की बातें चली थीं।

सूत्रों के मुताबिक बुधवार को हुई बैठक में पैनल में शामिल सभी 6-7 नामों पर विचार करने के बाद सिक्किम हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश नरेंद्र कुमार जैन के नाम पर सहमति बन गई। बताया जा रहा है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने नियुक्ति आदेश का मसौदा बनाकर भी मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है।

राजस्थान में जन्मे, वहीं वकालात की और बने न्यायाधीश

जस्टिस नरेंद्र कुमार जैन का जन्म राजस्थान के टोंक जिले में हुआ। स्कूल और कॉलेज की शिक्षा राजस्थान में लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1978 में वे बार कौंसिल ऑफ राजस्थान से जुड़े और राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बेंच में वकालात की।

2004 में राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायाधीश बने। 2012 में प्रशासनिक न्यायाधीश बनाया गया और वे उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रहे। सितंबर 2013 में उन्हें सिक्किम उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। कुछ ही दिनों बाद वे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और फिर नियमित न्यायाधीश नियुक्त किए गए। इसके बाद जस्टिस जैन को सिक्किम राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बनाया गया।