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साहो के लिए प्रभास नहीं ली डबिंग आर्टिस्ट की मदद,कानपुर के कमल अहमद ने सिखाई हिंदी

मुंबई। हिंदी और साउथ के कलाकारों और फिल्मों के बीच लगातार फर्क मिट रहा है। वहां के कलाकार भी हिंदी फिल्मों में डब की बजाय अपनी आवाज दे रहे हैं। 'बाहुबली’ फेम प्रभास ने 'साहो’ के लिए वही किया है। बाहुबली में शरद केलकर ने प्रभास के लिए डबिंग की थी।

कानपुर के कमल से ली मदद : प्रभास ने कानपुर के डायलेक्ट कोच कमल अहमद से हिंदी के लेसन लिए। कमल का खानदान चश्मों और ऑप्टिकल के बिजनेस में है। वे इत्तेफाक से इस फील्ड में आ गए। फिरोज अब्बास खान की 'गांधी माय फादर' बतौर डिक्शन कोच उनकी पहली फिल्म थी। आगे वे जोधा अकबर, अग्निपथ, ब्रद्रर्स और टू स्टेट्स में डिक्शन कोच थे।

हीरा हैं प्रभास : कमल ने बताया- प्रभास ने अपने डायलॉग खुद ही बोले। डबिंग के दौरान ज्यादातर डायलॉग तो वे एक ही टेक में फाइनल कर देते थे। हिंदी के बाकी कई शब्दों से भी उनका राब्ता रहा है। उनके मायने उन्हें भली-भांति पता रहे हैं। साथ ही नामालूम शब्दों के मायने जानने में उनकी बड़ी जिज्ञासा रहती थी। मिसाल के तौर पर 'बुनियाद’। प्रभास बड़े जमीनी इंसान हैं। पूरे शूट, डबिंग के दौरान वे मुझे गुरू के तौर पर इज्जत देते रहे। वे हीरा हैं हीरा।'

 

 

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