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कठुआ गैंगरेप: SC का महबूबा सरकार को निर्देश, पीड़िता के परिवार और वकील को मिले सुरक्षा

कठुआ (जम्मू-कश्मीर)। कठुआ में मासूम बच्ची के साथ गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार को निर्देश दिया कि पीड़िता के परिजनों और उसके वकील को सुरक्षा प्रदान की जाए। वहीं केस को राज्य से बाहर ट्रांसफर करने पर कोर्ट ने कहा कि इस पर 27 अप्रैल को सुनवाई की जाएगी। दरअसल पीड़ित परिवार ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी कि केस को चंडीगढ़ में ट्रांसफर किया जाए।

बच्ची से गैंगरेप कर उसकी हत्या करने के मामले में आठ आरोपियों को आज राज्य की एक कोर्ट में पेश किया गया। मामले में यहां सुनवाई शुरू होने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय गुप्ता ने राज्य अपराध शाखा से आरोपियों को आरोप पत्र की प्रतियां देने का आदेश दिया और अगली सुनवाई की तारीख 28 अप्रैल तय की। इन आठ आरोपियों में एक नाबालिग और उसे भी गिरफ्तार किया गया है। उसने एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष जमानत का आवेदन दिया है जिस पर सुनवाई की जाएगी। वहीं आरोपियों ने खुद को बेकसूर बताते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश से नार्को टेस्ट कराने का अनुरोध किया।

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ये हैं वो 8 आरोपी
कठुआ में एक गांव के ‘देवीस्थान’ की देखरेख करने वाले संजी राम को इस अपराध के पीछे मुख्य साजिशकर्त्ता बताया गया है। इस अपराध में विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और सुरेंद्र वर्मा, प्रवेश कुमार ऊर्फ मन्नू, सांजी राम का भतीजा, एक नाबालिग, और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा ऊर्फ ‘‘शम्मा’’ शामिल थे। आरोप पत्र में जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्ता का भी नाम है जिन्होंने कथित तौर पर राम से चार लाख रुपए लिए और अहम साक्ष्य नष्ट किए।

पीड़िता की वकील ने जताई हत्या की आशंका
पीड़िता का केस लड़ रही वकील दीपिका सिंह राजावत ने कहा कि मामले की सुनवाई कठुआ की अदालत में होने पर उनकी जान को भी खतरा है। उन्हें आशंका है कि उनके साथ भी रेप या हत्या जैसा कुछ हो सकता है। एडवोकेट दीपिका ने केस की सुनवाई कठुआ से बाहर करने की मांग की है।

1 हफ्ते तक बच्ची को बंधक बनाकर रखा
आरोपियों को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के रासना गांव से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार लोगों पर आरोप है कि उन्होंने आठ साल की बच्ची को जनवरी में एक सप्ताह तक कठुआ जिले के एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर रखा था। बच्ची को नशीला पदार्थ देकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के लगभग दो दिनों के बाद 17 जनवरी को बच्ची के शव को जंगल से बरामद किया गया। नाबालिग आरोपी के खिलाफ अलग से आरोप-पत्र दाखिल किया गया है।

पुलिस अधिकारी ने भी पार की मानवीयता की हदें
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 15 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किया था जिनमें आठ आरोपियों के नाम शामिल हैं। आरोपियों ने बच्ची के साथ दरिंदगी की हद पार की है। आरोप-पत्र के अनुसार इस पूरी दरिंदगी के पीछे का साजिशकर्ता सनजी राम है। पुलिस ने दावा किया है कि रासना गांव में देवीस्थान के सेवादार सनजी राम ने बकरवाल समुदाय (अल्पसंख्यक समुदाय) को इलाके से हटाने के लिए बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की साजिश रची थी। इस घिनौने कृत्य में सनजी राम के अलावा उसका नाबालिग भतीजा और पुलिस अधिकारी भी शामिल है। आरोप-पत्र के अनुसार 10 जनवरी को सनजी राम के कहने पर उसके भतीजे ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर बच्ची को अगवा किया था।

बच्ची को नशीली दवाएं देकर देवीस्थान ले जाया गया जहां सभी आठ आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान पुलिस ने भी अपनी जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया के नेतृत्व में पुलिस सनजी राम के घर भी पहुंची लेकिन उसने रिश्वत देकर उनका मुंह बंद कर दिया। आरोप-पत्र में दरिंदगी की हद का जिक्र करते हुए कहा गया कि बच्ची को मारने के लिए जब आरोपी उसे एक पुलिया के पास ले गए तो पुलिस अधिकारी ने उनसे बच्ची को अभी नहीं मारने को कहा क्योंकि वह भी दुष्कर्म करना चाहता था। इसके बाद आरोपियों ने बच्ची को मारकर जंगल में फेंक दिया।