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रोलआउट : धीमे इंटरनेट पर तेजी से चलेगा 'गूगल गो', कम मेमोरी वाले एंड्रॉयड फोन के लिए किया डिजायन

गैजेट डेस्क। गूगल ने अपने सर्च इंजन का लाइट वर्जन गूगल गो (Google Go) रोलआउट कर दिया है। गूगल ने सफल टेस्टिंग के बाद ही इसे भारत के साथ दूसरे देशों में रोलआउट किया है। एंड्रॉयड यूजर्स इसे गूगल प्ले स्टोर से फोन में इन्स्टॉल कर सकते हैं। ये दुनिया के सभी नेटवर्क पर काम करेगा।

Google Go

मोबाइल ऐप स्टोर मार्केटिंग इंटेलिजेंस सेंसर टावर की डेटा का मुताबिक गूगल गो को दुनियाभर में लगभग 17.5 मिलियन बार इन्स्टॉल किया गया है, जिसमें सबसे बड़ा नंबर भारत का है। 48 प्रतिशत भारतीय यूजर्स ने इसे फोन में इन्स्टॉल किया है। गूगल गो लोगों की कम स्पेस में डिवाइसेज को संग्रह करने में मदद करता है और उन्हें स्लो होने से भी रोकता है।

 Google Go

गूगल गो के प्रोडक्ट मैनेजर बिबो जू ने कहा, "इसका साइज सिर्फ 7MB है। गूगल गो पर वेब सर्च करते हैं तब ये फोन को स्लो होने से बचता है। यहां पर यूजर को पसंदीदा ऐप्स डाउनलोड करने का भी विकल्प मिलता है।" यदि गूगल गो पर सर्चिंग के दौरान कनेक्टिविटी खो देते हैं, तब दोबारा ऑनलाइन होने पर सर्च रिजल्ट वहीं से आएगा, जहां बंद हुआ था।

Google Go

गूगल गो 2017 से एंड्रॉयड डिवाइस पर कुछ देशों में मौजूद था। इस साल की शुरुआत में गूगल ने ''लेंस इन गूगल गो' को शोकेस किया था। ये कैमरा की मदद से पढ़ने, ट्रांसलेट करने और सर्च करने का काम करता है। जू ने कहा, "जब आप किसी टेक्स्ट को ढूंढना चाहते हैं तब कैमरा लेंस को ओपन करके उस वर्ड पर पॉइन्ट करें, इससे आप उस वर्ड को पढ़ने और ट्रांसलेट कर पाएंगे।"

 Google Go

गूगल गो AI पावर्ड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) है। इससे आप किसी भी वेब पेज को पढ़ सकते हैं। यूजर्स गूगल गो को प्ले स्टोर से इन्स्टॉल कर सकते हैं। ये एंड्रॉयड वर्जन 5.0 लॉलीपॉप और उससे ऊपर के सभी वर्जन पर काम करता है।

 

 

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