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मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर आज होगा UN में फैसला, चीन पर भी दबाव

वॉशिंगटन। पाकिस्तान की जमीन पर पल रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए 13 मार्च, बुधवार यानी आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया जाएगा। इस प्रस्ताव को इस बार फ्रांस पेश करेगा।

यदि बुधवार दोपहर तीन बजे तक इस पर कोई आपत्ति नहीं आती है, तो उसे वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया जाएगा। ऐसा होने पर विदेशों में उसकी संपत्ति फ्रीज कर दी जाएगी, उसकी यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा और वह हथियार लेकर नहीं चल सकेगा। हालांकि, इस बार भी दुनिया की नजरें पाकिस्तान के सदाबहार दोस्त चीन पर है, जो वीटो कर अजहर को बचा सकता है।

बताते चलें कि इससे पहले भी तीन बार मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पारित हो चुका है, लेकिन हर बार चीन ने वीटो कर इसमें अडंगा लगाया है। हालांकि, भारत ने इस बार पुलवामा हमले के गुनहगार मसूद अजहर की घेराबंदी में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है।

नई दिल्ली ने प्रस्ताव को पारित करने में अहम भूमिका निभाने वाले देशों- अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, तुर्की और बीजिंग से प्रस्ताव पर समर्थन के लिए बीते दिनों में कई बार बात की है। फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए प्रस्ताव लेकर आया जिस पर आज सुनवाई है।

दरअसल, पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति पर काम किया। इसमें भारत को बड़ी कामयाबी भी मिली। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, न्यूजीलैंड और सऊदी अरब सहित दुनिया के कई बड़े देश भारत के साथ खड़े हैं।

अमेरिका ने कहा है कि जैश-ए-मोहम्मद क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए खतरा है। चीन एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के रूप में जैश के नेता मसूद अजहर के नाम पर यदि संयुक्त राष्ट्र में वीटो करता है, तो यह स्थिरता के लिए अमेरिका और चीन के साझा लक्ष्यों को प्रभावित करेगा।

स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता रॉबर्ट पल्लडिनो ने एक सवाल के जवाब में कहा, जैश संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी समूह है। मसूद अजहर जैश का संस्थापक और नेता हैं और वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंंधित किए जाने के सारे मानदंडों को पूरा करते हैं। जैश कई आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है और क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए खतरा है।

हालांकि, चीन ने इस बार भी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। मसूद के मामले में चीन का अब तक ढुलमुल रवैया रहा है। उसका कहना है कि दोनों देशों को बातचीत से टेंशन को कम करना चाहिए। चीन ने कहा कि पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव को कम करने में अपनी बातचीत में सुरक्षा मुद्दों को एक ‘महत्वपूर्ण विषय’ बनाया गया है।

चीन के इस बयान के बाद अमेरिका और रूस ने चीन पर अपने पहले के रुख को बदलने का दबाव बना रखा है। पाकिस्तान भी वैश्विक दबाव के बाद मसूद पर कार्रवाई के संकेत दे चुका है। ऐसे में अगर चीन इस प्रस्ताव पर अड़ंगा नहीं लगाता है, तो मसूद वैश्विक आतंकी घोषित होगा।

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