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आने वाले दिनों में GST की दरों में सरकार कर सकती है कटौती : जेटली

नई दिल्ली। सरकार आने वाले दिनों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में और कटौती की दिशा में कदम उठा सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाते हुए 12 और 18 प्रतिशत की स्लैब को मिलाकर बीच का कोई नया स्लैब करने का संकेत दिया है। उन्होंने कांग्रेस को याद दिलाया कि उसने कुल मिलाकर 31 फीसद परोक्ष कर लगाकर देश का दमन किया था। ऐसे में वह जीएसटी को लेकर आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांके।

वित्त मंत्री ने कहा कि राजस्व में वृद्धि होने पर भारत में जीएसटी की एक स्टैंडर्ड दर 12 से 18 फीसद के बीच होगी। इसके अलावा आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी शून्य व पांच फीसद तथा लग्जरी व सिन गुड्स (सिगरेट, हानिकारक पेय पदार्थ और जुए जैसी वस्तुएं और सेवा जो प्रचलन में तो हैं लेकिन व्यक्ति और समाज के लिए हानिकारक हैं) के लिए जीएसटी की उच्च दर होगी।'जीएसटी के 18 महीने' शीर्षक से फेसबुक पोस्ट में जेटली ने कहा कि फिलहाल जीएसटी के दायरे में 1,216 वस्तुएं हैं। इनमें 183 वस्तुओं पर जीएसटी की दर शून्य है। वहीं, 308 पर पांच फीसद, 178 पर 12 फीसद और 517 वस्तुओं पर 18 फीसद है। उन्होंने कहा कि 28 फीसद जीएसटी का स्लैब अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। फिलहाल इसमें सिर्फ 28 बस्तुएं बचीं हैं जिनमें एसी, डिश-वाशर, ऑटो पार्ट्स, लग्जरी गुड्स व सिन गुड्स और सीमेंट जैसे उत्पाद ही शामिल हैं।

जीएसटी पिछले वर्ष पहली जुलाई को लागू हुआ था। जेटली ने कहा कि लग्जरी और सिन गुड्स को छोड़कर शेष वस्तुओं में 28 फीसद की स्लैब चरणबद्ध तरीके से खत्म हो रहा है और इस तरह सरकार जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाने के पहले चरण को पूरा करने के करीब है। जेटली ने कहा कि जीएसटी के भविष्य की राह 12 और 18 फीसद की स्लैब को मिलाकर एक करने की हो सकती है। यह दोनों के बीच किसी एक बिन्दु पर कोई दर हो सकती है। स्वाभाविक है कि इसमें कुछ समय लगेगा और यह तभी संभव होगा जब राजस्व में वृद्धि हो जाए।

इसके बाद देश में जीएसटी की सिर्फ शून्य और पांच फीसद, 12 और 18 फीसद के बीच एक स्टैंडर्ड दर और सिन गुड्स के लिए अलग दरें रहेंगी। जेटली ने कहा कि सरकार की अगली प्राथमिकता सीमेंट पर जीएसटी कम करने की होगी। बाकी सभी बिल्डिंग मैटीरियल को 18 और 12 फीसद की जीएसटी स्लैब में लाया जा चुका है। जेटली ने जीएसटी की आलोचनाओं को आधी-अधूरी जानकारी और पूर्वाग्रह से ग्रसित करार देते हुए कहा कि नए परोक्ष कर से देश में महंगाई कम रही है, कर चोरी पर लगाम लगी है और टैक्स की दर भी नीची रही है।

आने वाले वर्षों में कर संग्रह में और वृद्धि होगी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि गैर-जिम्मेदाराना राजनीति और अर्थशास्त्र रसातल में जाने की रेस है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले अधिकांश वस्तुओं पर कुल टैक्स 31 फीसद से अधिक था। उस समय उत्पाद शुल्क, वैट व सेवा कर जैसे परोक्ष कर लगते थे।

जेटली ने कहा कि जीएसटी की दरें घटने के बावजूद चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीने में जीएसटी संग्रह में खासी वृद्धि हुई है। पिछले साल औसतन मासिक जीएसटी संग्रह 89,700 करोड़ रुपये था जबकि इस साल यह 97,100 करोड़ रुपये रहा है।