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करतारपुर कॉरिडोर: सुषमा स्वराज की गैरमौजूदगी पर PAK बोला- 'उनसे ज्यादा उम्मीदें नहीं थी'

नई दिल्ली। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि भारत को एक बार फिर से बातचीत के बारे में सोचना चाहिए. बुधवार को भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि करतारपुर कॉरिडोर शुरू होने का मतलब ये नहीं है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत बहाल हो जाएगी.

सुषमा स्वराज ने कहा कि द्विपक्षीय बातचीत और करतारपुर कॉरिडोर दोनों अलग-अलग मसले हैं. भारत सरकार पिछले 20 सालों से इस कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान से बातचीत कर रही है

मीडिया बातचीत करते हुए शाह महमूद कुरैशी ने एक बार फिर से सुषमा स्वराज को बातचीत का न्योता दिया. उन्होंने कहा, ''अगर द्विपक्षीय बातचीत संभव न हो तो कम से सार्क सम्मेलन के जरिए चीजें आगे बढ़नी चाहिए. आपको बता दें कि सार्क सम्मेलन इस्लामाबाद में होने वाला है लेकिन अभी इसका समय तय नहीं हुआ है.

करतारपुर कॉरिडोर की आधारशिला रखे जाने से ठीक पहले सुषमा स्वराज ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाएगा तब तक द्विपक्षीय बातचीत नहीं होगी. करतारपुर कॉरिडोर के कार्यक्रम के लिए सुषमा स्वराज को भी पाकिस्तान ने न्योता भेजा था. लेकिन वो वहां नहीं गई. भारत ने इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी को भेजा था.

कुरैशी ने कहा कि वो इस बात से दुखी नहीं हैं कि सुषमा स्वराज ने इस कार्यक्रम में भाग नहीं लिया. दरअसल उन्हें पहले से ही ये लग रहा था कि स्वराज इस कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान नहीं आएंगी.कुरैशी से जब 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमांइड हाफिज सईद के खिलाफ कोई एक्शन न लिए जाने पर पूछा गया तो उन्होंने इस सवाल का जवाब ये कहते हुए टाल दिया कि मामला फिलहाल कोर्ट में है.करतारपुर कॉरिडोर की आधारशिला रखे जाने के कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने भाषण में कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा, 'इंसान चांद पर पहुंच चुका है और हम एक मसला हल नहीं कर पा रहे हैं. हमारा मसला सिर्फ कश्मीर का है और ये तभी हल हो पाएगा जब हम दृढ़ता से फैसला लेंगे'

विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि इस पवित्र मौके पर इमरान खान को कश्मीर का जिक्र नहीं करना चाहिए था।

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