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ऑनलाइन गेम खेलने वाले हो जाएं सावधान, 70 फीसद यूजर्स ने कहा उनके साथ हुआ ऐसा

ऑनलाइन गेम्स को लेकर आज कल लोगों में क्रेज बढ़ता जा रहा है। मगर, इसका स्याह पहलू भी है। कई लोगों के लिए ऑनलाइन गेम एक टार्गेट में बदलने जैसा हो सकता है। साल 2017 में किए गए प्यू सर्वेक्षण में पाया गया कि इसकी वजह से 41 फीसद अमेरिकी इंटरनेट पर किसी न किसी तरह के उत्पीड़न के शिकार हुए थे।

इसके अलावा, टिंडर के 39 फीसद यूजर्स ने किसी न किसी तरह के उत्पीड़न की सूचना दी। रोजाना रेडिट इस्तेमाल करने वाले 38 फीसद यूजर्स, और 37 फीसद फेसबुक यूजर्स ने ऑनलाइन दुर्व्यवहार की सूचना दी। यदि आप वास्तव में अपने दिन को बर्बाद करना चाहते हैं, तो ऑनलाइन मल्टीप्लेयर वीडियो गेम खेलने से बेहतर कोई दूसरा रास्ता नहीं है। गेम एनालिटिक्स फर्म न्यूज़ू के साथ मिलकर एंटी-डिफेमेशन लीग ने एक सर्वे किया, जिससे पता चला कि गेमिंग में कितनी बुरी चीजें जुड़ गई हैं।

सर्वे के अनुसार, ऑनलाइन गेमर्स के 74 फीसद ने अन्य खिलाड़ियों से किसी न किसी तरह के उत्पीड़न का अनुभव किया। सर्वे में 50 फीसद यूजर्स को उनके लिंग या जातीयता के आधार पर भेदभाव किए जाने की सूचना मिली और 29 फीसद ने कहा कि ‘मेरे बारे में एक अजनबी ने निजी जानकारी प्रकाशित की थी।'

कुछ खास ऑनलाइन खेलों में उत्पीड़न का स्तर विशेष रूप से ज्यादा था। सर्वे के अनुसार, डोटा-2 सबसे जहरीला ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम है, जिसमें 79 फीसद खिलाड़ियों ने दावा किया है कि खेल के दौरान किसी समय उन्हें परेशान किया गया था। ओवरवॉच और फोर्टनाइट गेम खेलने वाले 75 फीसद और 70 फीसद यूजर्स ने उत्पीड़न की शिकायत की थी।

23 फीसद लोगों ने कहा कि वे श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा के विचार-विमर्श के संपर्क में थे, वहीं 9 फीसद लोगों ने खेलते समय होलोकॉस्ट की चर्चा को सुना था। सर्वे में 18 से 45 वर्ष की आयु के 1,045 यूजर्स को शामिल किया गया था। इन लोगों में से LGBTQ+, यहूदी, मुस्लिम, अफ्रीकी अमेरिकी और हिस्पैनिक/लेटेक्स लोगों को शामिल किया गया था और यह सुनिश्चित किया गया था हर समूह के कम से कम 60 लोग इस सर्वे में शामिल हों।

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