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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव: गृह मंत्रालय ने मांगी हिंसा पर रिपोर्ट, अब तक 12 की मौत, सीपीएम कार्यकर्ताओं को जिंदा जलाया

कोलकाता। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पश्चिम बंगाल में बहुप्रतीक्षित पंचायत चुनाव आज कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल में चल रहे पंचायत चुनाव मतदान के दौरान हुई जबरदस्त हिंसा में अब तक 12 लोगों की मौत हो गई है। मतदान के दिन हुई इस हिंसा पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है। वहीं लेफ्ट पार्टियों ने चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर हिंसा के विरोध में प्रदर्शन किया है। बर्द्धमान, चौबीस परगना, मालदा, कूचबिहार समेत कई इलाकों में हिंसक झड़प हुई। बता दें कि अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में आज होने वाला पंचायत चुनाव अंतिम बड़ा चुनाव है। मतदान सुबह सात बजे शुरू हो गया है जो शाम पांच बजे तक चलेगा। मतगणना 17 मई को की जाएगी। एक चरण में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए तीव्र प्रचार अभियान हुआ था। चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान हुई हिंसा को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस और वाममोर्चा के नेताओं ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।

- पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में जबरदस्त हिंसा में अब तक पांच लोगों की मौत, सीपीएम कार्यकर्ताओं को जिंदा जलाया

- बर्द्धमान,चौबीस परगना,मालदा, कूचबिहार समेत कई इलाकों में हिंसक झड़प

- कुलटाली क्षेत्र के साउथ परगना 24 में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता आरिफ गाजी की गोली मारकर हत्या

- मुर्शिदाबाद में एक पोलिंग बूथ पर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। इसके बाद यहा पोलिंग पेपर को नाले में फेंकने का मामला सामने आया है। अभी यहां मतदान का काम रूका हुआ है।

ANI
@ANI
West Bengal: Members of CPI(M), Revolutionary Socialist Party (RSP) & other parties of the Left Front staging protest outside State Election Commission againt the incidents of violence during the #PanchayatElection
4:18 अपराह्न - 14 मई 2018
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- पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में आज सुबह नौ बजे तक 11.93 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। राज्य के कई हिस्सों में हिंसा की घटनाओं में कई लोग घायल हो गए हैं।

- 102 साल की बुजुर्ग महिला पश्चिमी मादीपुर के दंतान में वोट डालने पहुंची

- नादिया जिले में एक निर्दलीय उम्‍मीदवार की गोली मारकर हत्‍या

- कूच बिहार के शुतबाड़ी में तृणमूल कांग्रेस और निर्दलीय उम्‍मीदवार के बीच हुई हिंसा

 

 

 

 

- जलपाईगुड़ी, नॉर्थ 24 परगना सहित बीस जिलों में डाले जा रहे हैं वोट, 17 मई को आएंगे नतीजे

- पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग शुरू

- आसनसोल जिले के रानीगंज में बांसरा इलाके से बमबारी की खबर है, यहां वोटिंग शुरू होने से पहले ही बम विस्फोट की घटना हुई, जिसके बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने नामांकन प्रक्रिया के दौरान हिंसा की। तृणमूल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि विपक्ष का कोई जनाधार नहीं है और वह चुनाव से बचने का प्रयास कर रहे थे। सभी पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने इस चुनाव में प्रचार किया। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रचार नहीं किया। उन्होंने लोगों से अपनी सरकार के विकास कार्यों के समर्थन में वोट करने की अपील की।

पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार कल 621 जिला परिषदों, 6,157 पंचायत समितियों और 31,827 ग्राम पंचायतों में चुनाव होगा। चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है और असम, ओडिशा, सिक्किम और आंध्र प्रदेश से लगभग 1,500 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। सुरक्षा बलों ने सुरक्षा प्रबंधों के तहत राज्य के विभिन्न भागों में आज मार्च निकाला।

इस बार पंचायत चुनाव में राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सरकार, सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी भाजपा, कांग्रेस तथा वाममोर्चा के बीच एक अभूतपूर्व कानूनी लड़ाई देखने को मिली।

बंगाल पंचायत चुनावों में एक-दूसरे को चुनौती दे रहे परिवार के लोग

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों में कई जगहों पर परिवार के लोग एक-दूसरे को शिकस्त देने के लिए चुनावी मैदान में खड़े हैं और ऐसी जगहों पर मुकाबला काफी रोचक दिखता है। राज्य में 58,000 सीटों पर आज त्रिस्तरीय चुनाव है। कई जगह परिवार के सदस्यों के एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने के चलते चुनाव काफी रोचक हो गया है। ऐसी कई जगह हैं जहां बाप के खिलाफ बेटा और मां के खिलाफ बेटी चुनाव लड़ रही है। दामाद ससुर के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है और भाई बहन के खिलाफ मैदान में है।

तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और वाम दलों ने संबंधित क्षेत्रों में किसी परिवार की लोकप्रियता के चलते परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के खिलाफ अपने चुनाव चिह्न पर मैदान में उतारा है। उदाहरण के लिए अलीपुरद्वार जिले में एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक भोगनारायण दास तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर अपने बेटे अमाल के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। बेटा भाजपा उम्मीदवार है। दास (68) ने अपने बेटे से चुनाव से दूर रहने को कहा था क्योंकि इससे परिवार में खटास पैदा हो सकती है। बेटे ने पिता की सलाह मानने से इनकार कर दिया। अमाल ने कहा, ‘‘मैंने अपने पिता से कहा कि राजनीति विचारधारा और राजनीतिक विश्वास का मामला है और हमारी राजनीतिक जंग से हमारे संबंधों को कोई नुकसान नहीं होगा।’’

उत्तरी 24 परगना जिले की जगुलिया ग्राम पंचायत में एक ही परिवार की दो बहूएं एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही हैं। रीमा दास तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं तो उनकी जेठानी बुलबुल दास निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं। देवरानी-जेठानी दोनों का कहना है कि इससे उनके पारिवारिक संबंधों में कोई खटास नहीं आएगी।

नदिया जिले की तलडाहा-मझदिया ग्राम पंचायत में एक ही परिवार के तीन लोग एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्वी मिदनापुर जिले से तृणमूल कांग्रेस के जिला परिषद उम्मीदवार पार्थ प्रतिम दास इस बात से नाराज हैं कि उनकी पत्नी लिपिका एक नजदीक की सीट पर भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, लिपिका ने कहा कि उन्होंने पति से कई साल तक राजनीति छोड़ने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। इसलिए वह अपने पति को सबक सिखाना चाहती थीं। उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछले कुछ साल से अलग रह रहे हैं।’’

राज्य में इस तरह के कई उदाहरण हैं जहां परिवार के लोग एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी जंग लड़ रहे हैं।