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राजीव को भी प्रचंड बहुमत मिला था, लेकिन डर नहीं फैलाया: सोनिया

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को अलग अंदाज में मोदी सरकार पर निशाना साधा। राजीव गांधी के 75वें जयंती वर्ष पर आयोजित पार्टी के विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोनिया ने कहा, राजीव ने कभी बहुमत की ताकत का इस्तेमाल डराने-धमकाने के लिए नहीं किया। पढ़िए सोनिया की कही बड़ी बातें -

पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी पर जारी घमासान के बीच सोनिया ने कहा, 'राजीव गांधी 1984 में बेमिसाल बहुमत से जीतकर आए थे। उन्होंने उस ताकत का इस्तेमाल डराने-धमकाने के लिए नहीं किया। संस्थानों की आजादी को नष्ट करने के लिए नहीं किया। असहमति और विरोध के स्वर को कुचलने के लिए नहीं किया। लोकतांत्रिक परंपरा और जीवन शैली के लिए खतरा पैदा करने के लिए नहीं किया।'

'1989 में कांग्रेस दोबारा अकेले पूरे बहुमत से जीतकर नहीं आ पाई। तब राजीव ने गरिमा और विनम्रता के साथ जनादेश को स्वीकार किया। कांग्रेस के सबसे बड़ा राजनीतिक दल होने के बावजूद सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि उनके नैतिक बल, उदारता और उनकी ईमानदारी ने ऐसा करने नहीं दिया। ऐसा आज कोई नहीं कर सकता।'
'चुनावी हार-जीत होती रहती है। कांग्रेस के सामने आज बहुत बड़ी चुनौती है कि वह विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ अपनी वैचारिक लड़ाई मजबूती से जारी रखे। ये ताकतें आज समाज का स्वरूप ही नहीं भारत की बुनियादी आत्मा, जिसकी आधारशिला हमारे संविधान ने रखी है, उसे बदलने पर उतारू हैं।'

सोनिया गांधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री के तौर पर राजीव गांधी के पांच साल के अहम कामों का भी जिक्र किया जिसने नए और आधुनिक भारत की नींव रखी। सोनिया ने 18 साल के युवाओं को मतदान का अधिकार, पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा देना, कंप्यूटर और दूरसंचार क्रांति को राजीव का अमिट योगदान बताया। देश की एकता और अखंडता के लिए पंजाब समझौता, मिजोरम समझौता, त्रिपुरा समझौता, असम समझौता और दार्जिलिंग हिल काउंसिल समझौता किया।

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