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Guru Nanak Jayanti 550th Gurpurab 2019: प्रकाशोत्सव के अवसर पर गुरुद्वारे में दे सेवा और करें यह काम

गुरु नानक देव का जीवन समाज और देश को समर्पित रहा। उन्होंने अपना सारा जीवन उस वक्त समाज में व्याप्त कुरीतियों और बुराईयों को हटाने में बीता दिया। समाज में फैले हुए अंधविश्वास से लड़ते हुए उनको यह महसूस हुआ कि आडंबरों से हटकर देश को एक नए धर्म की जरूरत है तो उन्होंने सिख धर्म की स्थापना की। उन्होंने देश को एक नई समावेशी विचारधारा के साथ चलाने की कोशिश की और लोग उनके साथ जुड़ते चले गए।

गुरु नानकदेवजी ने कई देशों की यात्रा की और लोगों को उपदेश दिए। 1521 तक उन्होंने अपनी यात्रा के चार चक्र पूरे किए। उनकी धार्मिक यात्राओं और सत्संगों को उदासियां कहा जाता है। गुरु नानकदेवजी ने भारत के अलावा अफगानिस्तान और अरब देशों की यात्रा की। उन्होंने मक्का से लेकर अयोध्या में राम जन्मभूमि तक की यात्रा की। उनकी जिंदगी से जुड़े कई गुरुद्वारे देश के विभिन्न हिस्सों और कुछ सीमापार पाकिस्तान के पंजाब में हैं। इन गुरुद्वारों में श्रद्धालु मत्था टेकने के लिए जाते हैं। इन गुरुद्वारों में स्वर्ण मंदिर, डेरा बाबा नानक, आनंदपुर साहिब, करतारपुर साहिब, ननकाना साहिब, पंजा साहिब आदि प्रमुख है।

ऐसे करें प्रकाशोत्सव पर दिन की शुरूआत

सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर गुरवाणी का पाठ करें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर गुरुद्वारा जाएं और मत्था टेकें। संगत के दर्शन करें और गुरुवाणी का पाठ करने के साथ कीर्तन में हिस्सा लें। सिख गुरुओं की गौरवगाथा को सुने। वहां पर अरदास का श्रवण करें। गुरुद्वारे के लंगर में सेवा करें इसके साथ संगत गुरुघर और गुरुद्वारे के दूसरे हिस्सों में जहां पर सेवा की जरूरत है वहां पर अपनी सेवा दें। गरीबों को दान-पुण्य करें।

गुरु नानकदेवजी का जन्म अर्धरात्रि को लगभग 1 बजकर 40 मिनट पर हुआ था। इसलिए इस दिन रात्रि जागरण का भी महत्व है। प्रकाशोत्सव के अवसर पर रात में विशेष आकर्षक साज-सज्जा की जाती है। रात में गुरुद्वारे में कीर्तन, सत्संग का आयोजन किया जाता है। सामूहिक अरदास की जाती है और कड़ा- प्रसाद का वितरण कर श्रद्धालु एक-दूसरे को जन्मोत्सव की बधाई देते हैं। इस अवसर पर उम्दा आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है।