Follow us:

सर्वपितृ अमावस्या: अंतिम दिन ऐसे करें पितरों का श्राद्ध

भाद्र पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होकर अश्वनी माह की अमावस्या तक रहने वाले पितृ पक्ष अमावस्या तिथि को समाप्त होते हैं. यह श्राद्ध का 15वां दिन है. इसे सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं.

जब पितरों की देहावसान तिथि अज्ञात हो तो पितरों की शांति के लिए पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करने का नियम हैं. आप सभी पितरों की तिथि याद नहीं रख सकते हैं. ऐसी दशा में भी पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करना चाहिए. इस दिन किसी सात्विक और विद्वान ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करें और उनसे भोजन करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें. स्नान करके शुद्ध मन से भोजन बनाएं, लेकिन भोजन सात्विक होना चाहिए.

सर्वपितृ अमावस्या को प्रात: स्नानादि के पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिए. इसके पश्चात घर में श्राद्ध के लिए बनाए गए भोजन से पंचबलि अर्थात गाय, कुत्ते, कौए, देव एवं चीटिंयों के लिये भोजन का अंश निकालकर उन्हें देना चाहिए. इसके पश्चात श्रद्धापूर्वक पितरों से मंगल की कामना करनी चाहिए. संध्या के समय सामर्थ्य के अनुसार, दो, पांच अथवा सोलह दीप भी प्रज्जवलित करने चाहिए.

सर्वपितृ अमावस्या पर ऐसा हो भोजन-

भोजन में खीर पूड़ी का होना आवश्यक है. भोजन कराने तथा श्राद्ध करने का समय दोपहर होना चाहिए. ब्राह्मण को भोजन कराने के पूर्व पंचबली दें और हवन करें. श्रद्धा पूर्वक ब्राह्मण को भोजन कराएं, उनका तिलक करके दक्षिणा देकर विदा करें. बाद में घर के सभी सदस्य एक साथ भोजन करें और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें.

सर्वपितृ अमावस्या पर ऐसे करें श्राद्ध-

- सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों को शांति देने के लिए और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ अवश्य ही करें. साथ ही उसका पूरा फल पितरों को समर्पित करें.

- जो व्यक्ति पितृपक्ष के 15 दिनों तक तर्पण, श्राद्ध आदि नहीं कर पाते या जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि याद न हो, उन सभी लोगों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, दान आदि इसी अमावस्या को किया जाता है.

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या करें-

- शास्त्रों के अनुसार पीपल की सेवा और पूजा करने से हमारे पितृ प्रसन्न रहते हैं.

- इस दिन स्टील के लोटे में, दूध, पानी, काले तिल, शहद और जौ मिला लें.

- इसके साथ कोई भी सफ़ेद मिठाई, एक नारियल, कुछ सिक्के और एक जनेऊ लेकर पीपल वृक्ष के नीचे जाकर सर्व प्रथम लोटे की समस्त सामग्री पीपल की जड़ में अर्पित कर दें.

- इस मंत्र का जाप भी लगातार करते रहें, ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः

सर्वपितृ अमावस्या तिथि व श्राद्ध कर्म मुहूर्त

सर्वपितृ अमावस्या तिथि – 8 अक्तूबर 2018, सोमवार

कुतुप मुहूर्त – 11:45 से 12:31

रौहिण मुहूर्त – 12:31 से 13:17

अपराह्न काल – 13:17 से 15:36

अमावस्या तिथि आरंभ – 11:31 बजे (8 अक्तूबर 2018)

अमावस्या तिथि समाप्त – 09:16 बजे (9 अक्तूबर 2018)


व्यापार के लिए-

अमावस्या को किसी पीपल के वृक्ष की पूजा करें तथा पेड़ को जनेऊ व अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें. इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें. इससे श्रीहरि और मां महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर की सभी परेशानियां दूर होकर धन, सुख-संपत्ति आनी आरंभ हो जाती हैं.


धन प्राप्ति के लिए-

सर्वपितृ अमावस्या के लिए पितरों के निमित्त खीर बनाएं. उस खीर में से थोड़ा सा भाग लेकर किसी चांदी के बर्तन, कटोरी आदि में रखें. कुछ देर पश्चात् चांदी के बर्तन वाली खीर पूरी खीर में मिलाकर 21 कन्याओं और सात बालकों को खिलाएं. ऐसा करने से धन संबंधी परेशानी दूर होने लगती है.

शत्रु पर विजय के लिए-

यदि आपको भी कोई परेशान कर रहा है या आप मुकदमा आदि नहीं जीत पा रहे हैं तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन एक नारियल पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाकर उसे हनुमान मंदिर में अर्पित करें और शत्रुओं से संबंधित अपनी परेशानियां खत्म करने का आग्रह हनुमानजी से करें.