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धार में आयोज‍ित संगीतमय भागवत कथा में दुसरे द‍िन हुआ श‍िव पार्वती वि‍वाह, बडी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थ‍ित

धार। अनाज तिलहन व्यापारी समिति द्वारा आयोजित संगीतमय भागवत कथा में दुसरे दिन शंकर पार्वती विवाह सम्पन्न हुआ। पं. श्री अनिरूद्धचार्यजी महाराज ने अपनी मधुर वाणी सेे कथा के साथ भजन भी गाए। जिससे श्रृद्धालु झुम उठे। महाराज ने बताया कि भागवत कथा भगवान की इच्छा से ही हो रही है आप और हम तो इसके माध्यम हैं। कथा के द्वितीय दिवस बताया कि महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका जाने लगे तो रास्ते में कुन्ती मिल गई। कुन्ती ने बहुत रोका मगर भगवान द्वारिकावासियों का प्रेम वरण करने लगे और जाने को उत्सुक थे।


कुन्ती ने कहा मैं आपसे कुछ मांगना चाहती हु। भगवान बोले बुआ मांगों मत आदेश करों आपका हर कार्य करने के लिए मैं तैयार हुं। अगर तुम्हारी इच्छा मांगने की है तो मांग लो। कुन्ती ने कहा प्रभु मुझे दुख देदो। मेरे जीवन में पल-पल दुख आता रहे। भगवान के कहा बुआ तुमने जीवन में दुख ही भोगा है सुख तो कभी मिला ही नहीं फिर भी सुख की जगह दुख मांग रहीं हो । कुन्ती बोली प्रभु दुख में आप हमेशा याद आते हैं, आपके दर्शन होते है। जबकि सुख में सुख ही नजर आता है। हम धर्म में ईश्वर को भूल जाते है। इस तरह दुसरे दिन अनेक भगवान के किस्सों का वर्णन अनिरूद्धचार्यजी महाराज ने किया। कथा में बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थी। आयोजकों ने विशेष प्रसादी की व्यवस्था की।