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शिवसेना ने बुलंदशहर हिंसा को लेकर BJP पर बोला हमला, कहा- 2019 में यूपी में नहीं होगा 2014 वाला रिजल्ट

नई दिल्ली। बुलंदशहर हिंसा की घटना को लेकर पुलिस जांच जारी है. मुख्य आरोपी योगेश राज अब तक पुलिस के चंगुल से फरार है. इस बीच बड़ा खुलासा हुआ है, सूत्रों का कहना है कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और युवक सुमित को एक ही रिवॉल्वर से गोली मारी गई. इस पूरे घटनाक्रम पर जमकर राजनीति भी हो रही है. पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगाने कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं. महाराष्ट्र और केंद्र में बीजेपी की सहयोगी और लगातार मुखर शिवसेना ने बुलंदशहर हिंसा को लेकर भी बीजेपी पर निशाना साधा है. शिवसेना ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की 80 सीटें 2019 में भी बीजेपी के लिए ‘गेम चेंजर’ होने वाली हैं.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा, ''बुलंदशहर में एक तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. सोमवार को उसका अंतिम दिन था. उसी समय गो हत्या की अफवाह फैली और जो होना था, वही हुआ. हमारे देश के खेतों में फसलें कई कारणों से नहीं उगतीं लेकिन अफवाह की फसल लहलहाकर आती है. ऊपर से इन अफवाहों के बाजार में अपना हाथ धोनेवाले सही-सलामत छूट जाते हैं.''

सामना में अखलाक मामले का जिक्र करते हुए लिखा, ''इस हिंसाचार के कंधे पर बंदूक रखकर किसी ने किसी का ‘गेम’ किया है क्या? अब ऐसे कई सवाल किए जा रहे हैं. जिस सुबोध कुमार सिंह नामक पुलिस अधिकारी की इस हिंसाचार में बलि चढ़ी है, उसके भाई और बहनों ने कई आरोप लगाए हैं.''

सामना में आगे लिखा है, ''2015 में उत्तर प्रदेश के दादरी में हुई अखलाख हत्या की तफ्तीश सुबोध कुमार सिंह ने ही की थी. गो मांस रखने के संदेह के चलते उस समय भीड़ ने अखलाख की निर्मम हत्या कर दी थी. उस मामले के आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए सुबोध कुमार ने सख्त भूमिका अपनाई थी, ऐसा अब कहा जा रहा है. ऐसे में बुलंदशहर का उत्पात, उसमें सुबोध कुमार की चढ़ी बलि और अखलाख मामले में हुई कार्रवाई का एक-दूसरे से संबंध है क्या ऐसा सवाल अब पूछा जा रहा है.''

लोकसभा चुनाव के जिक्र के साथ सामना में लिखा है, "उत्तर प्रदेश की 80 सीटें 2019 में भी बीजेपी के लिए ‘गेम चेंजर’ होनेवाली हैं. उसी के लिए गो हत्या का ‘संशय पिशाच’ लोगों की गर्दन पर बैठाकर धार्मिक उन्माद का और वोटों के ध्रुवीकरण का वही रक्तरंजित ‘पैटर्न’ फिर से चलाने की कोशिश शुरू है क्या? आखिरकार सवाल उत्तर प्रदेश की 80 सीटों का और केंद्र के सत्ता सोपान का है.''

यहां पढ़ें सामना का पूरा लेख

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