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राफेल डील: विपक्ष के बाद अब सहयोगी ने उठाए सवाल, शिवसेना बोली- पीएम मोदी खुद दें जवाब

मुंबई। विपक्ष के बाद अब सहयोगी पार्टी शिवसेना ने राफेल सौदे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला किया है. शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कहा कि पीएम मोदी को राफेल पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए.

राउत ने कहा, ''बोफोर्स की तरह ही राफेल मुद्दा भी है. दोनों में सिर्फ आंकड़ों का फर्क है. फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने भी कहा है और उनकी बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्हीं की सरकार के दौरान बातचीत हुई थी.'' संजय राउत आगे कहते हैं, ''राफेल के मुद्दे पर जवाब देने की जिम्मेदारी हमारे प्रधानमंत्री की है. कांग्रेस अध्यक्ष क्या कह रहे हैं उससे हमको मतलब नहीं लेकिन देश को सच पता चलना चाहिए. राफेल के मुद्दे पर बीजेपी के किसी प्रवक्ता को नहीं बल्कि खुद प्रधानमंत्री को सामने आना चाहिए और जवाब देना चाहिए.''

संजय राउत का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल राफेल को लेकर सरकार पर हमलावर थे. यह पहला मौका है जब बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने प्रधानमंत्री से चुप्पी तोड़ने की मांग की है.
राहुल गांधी ने उठाए सवाल

राफेल फाइटर जेट पर हुए नए खुलासे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है. राहुल गांधी ने कहा कि मैं देश के युवाओं को बताना चाहता हूं कि हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री भ्रष्ट है. राफेल मामले में सीधे प्रधानमंत्री पर आरोप लग रहे हैं लेकिन वे चुप हैं. राहुल गांधी ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 30 हजार करोड़ रुपये वायुसेना से लेकर अनिल अंबानी की जेब में डाले. बता दें कि इससे पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को 'चोर' कहा था.

राहुल गांधी ने कहा, ''प्रधानमंत्री से हमने लोकसभा में भी सवाल पूछे थे. पूरा देश राफेल की बात कर रहा है, प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द नहीं निकलता. सुना है कि निर्मला सीतारमण फ्रांस गईं हैं. पता नहीं ऐसी क्या इमरजेंसी है कि रक्षा मंत्री फ्रांस जाकर दसॉल्ट फैक्ट्री जाना है. आप कल्पना कर सकते हैं कि क्या हो रहा है.''

आज राफेल पर क्या खुलासा हुआ है?
फ्रांस की मीडिया ने राफेल डील को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. बुधवार को हुए इस खुलासे में राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ड एविएशन के आंतरिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इसे ऑफसेट पार्टनर के तौर पर अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस के अलावा कोई विकल्प दिया ही नहीं गया था. वहीं, डसॉल्ट ने अपनी सफाई में कहा है कि राफेल डील में ऑफसेट पार्टनर का होनी जरूरी थी, लेकिन इसके लिए पार्टनर के तौर पर सिर्फ रिलायंस कंपनी के विकल्प जैसी बात नहीं थी. किसी भी कंपनी को चुनने के लिए डसॉल्ट स्वतंत्र था.

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