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Ganesh Utsav 2019 : मंगलकारी रवि योग में विराजेंगे मंगलमूर्ति, देंगे सुख-समृद्धि का आशीष

Ganesh Utsav 2019 इस वर्ष मंगलकारी रवि योग में घर-घर मंगलमूर्ति की स्थापना होगी। रवि योग के साथ हस्त और चित्रा नक्षत्र के संयोग में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना भक्तों को सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करेगी। इस वर्ष रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश पिता महादेव के प्रिय दिन सोमवार यानी 2 सितंबर को घरों के साथ गणेश पंडालों में विराजित होंगे। ज्योतिर्विदें के अनुसार हरतालिका तीज पर उठे संशय के बावजूद 2 सितंबर को भगवान गणेश की स्थापना करना शास्त्र सम्मत होगा।

ज्योतिर्विद् श्याम अग्रवाल के अनुसारभगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन मध्यान्ह काल में हुआ था। इस वर्ष 2 सितंबर को चतुर्थी तिथि सुबह 4.57 बजे से रात 1.54 बजे तक रहेगी। इसी दिन सूर्योदय से सुबह 8.32 बजे तक हस्त नक्षत्र और इसके बाद मंगलकारी चित्रा नक्षत्र रहेगा। इसके साथ ही 2 सितंबर को सुबह 8.33 से 3 सितंबर को सुबह 6.24 बजे तक रवि योग भी होगा।

ज्योतिर्विद् पं. सुमित रावल के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्यान्ह काल में हुआ था। इसके चलते मध्यान्ह काल में भगवान की स्थापना करना श्रेष्ठ है। इस दिन सुबह 11.04 से दोपहर 1.37 बजे तक गणेश पूजन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त है। यह अवधि करीब 2 घंटे 32 मिनट की रहेगी।

तृतीया के छय से हरतालिका तीज पर उपजा मतभेद

इस बार गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले तृतीया तिथि के क्षय से हरतालिका तीज पर संशय की स्थिति बन गई है। अलग-अलग विद्वान इसे अलग-अलग दिन बता रहे हैं। कोई 1 सितंबर तो कोई गणेश स्थापना के साथ 2 सितंबर को हरतालिका तीज मनाना शास्त्र सम्मत बता रहा है। 1 सितंबर को तृतीया तिथि सुबह 8.26 से अगले दिन सुबह 4.26 तक रहेगी। 1 व 2 सितंबर दोनों ही दिन तिथि सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही है। इसके चलते तिथि का क्षय हो गया है। इसमें एक पक्ष का कहना है कि तृतीया तिथि का क्षय हो गया है।

ऐसे में धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार द्वितीया तिथि के साथ ही तीज 1 सितंबर को मनाना शास्त्र सम्मत है। इधर, पं. विजय अड़ीचवाल का कहना है कि नीमच के निर्णय सागर पंचांग में हरतालिका तीज 1 सितंबर को बताई गई है, जबकि उज्जैन के महाकाल पंचांग में हरतालिका तीज 2 सितंबर को बताई गई है। निर्णय सिंधु ग्रंथ में हरतालिक तीज के बारे में स्पष्ट है कि हरतालिका व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया को होता है। उसमें अगली तिथि पर तीज मनाना चाहिए। चतुर्थी के साथ हरतालिका तीज करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके चलते 2 सितंबर को व्रत करना शास्त्र सम्मत है।

1 सितंबर को ही होगा राजवाड़ा पर आयोजन

हरतालिका तीज पर लोक संस्कृति मंच का पारंपरिक आयोजन राजवाड़ा पर 1 सितंबर को ही किया जाएगा। मंच के अध्यक्ष शंकर लालवानी और संयोजक सतीश शर्मा ने बताया कि इस दिन गन्नाू महाराज की भजन संध्या रात 9 बजे से होगी। रात 1 बजे मातृशक्तियां जल संरक्षण का सामूहिक संकल्प लेंगी। इस मौके पर भजनों पर थिरकने का सिलसिला भी रातभर चलेगा।

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