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अपराध रोकना आईजी-एसपी की ही नहीं, कलेक्टर की भी जिम्मेदारी है : मुख्यमंत्री

भोपाल। अपराध रोकना आईजी (पुलिस महानिरीक्षक), एसपी (पुलिस अधीक्षक) की ही नहीं, कलेक्टर की भी जिम्मेदारी है। कलेक्टर जिले में हर माह कम से कम एक बार सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करें। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को मंत्रालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों के साथ महिला अपराधों की समीक्षा करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि महिला अपराधों पर अंकुश लगाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए मैदानी अफसर टीम बनकर काम करें। यह जिम्मेदारी सिर्फ आईजी और एसपी की नहीं, बल्कि कलेक्टरों की भी है। वे माह में महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य प्रमुख विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करें। हम जनसुरक्षा विधेयक लाने जा रहे हैं।

उनके अनुसार घृणित काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में कोई कसर न छोड़ें। ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएं। इसके लिए स्वास्थ्य परीक्षण और विधिक पहलुओं पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसी जगह, जहां अपराध होने की संभावना अधिक रहती है, वहां गश्त बढ़ाई जाए। प्रकाश की व्यवस्था पूरी होनी चाहिए। जनता में सुरक्षा का भाव पैदा होना चाहिए। इसके लिए जागरुकता भी फैलाई जाए।

पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला ने कहा कि हम इस पर काम कर रहे हैं। स्कूल, कालेज, छात्रावास सहित अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। परिवहन विभाग की ओर से बैठक में बताया गया कि 31 दिसंबर तक स्कूल, कालेज वाहनों के अलावा लोक परिवहन के वाहनों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम पूरा हो जाएगा। परिवहन आयुक्त शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि महिला अपराधों में लिप्त ड्राइवरों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की प्रगति जिलों में धीमी है। इसे बढ़ाया जाए।

ग्वालियर आईजी बोले- एमएलसी रिपोर्ट मिलने में देर हो रही है

सूत्रों के मुताबिक बैठक में ग्वालियर आईजी अनिल कुमार ने कहा कि एमएलसी (मेडिको लीगल रिपोर्ट) मिलने में देर हो रही है। इससे कार्रवाई करने में विलंब होता है। इस पर मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से कहा कि इसे दिखवाएं। ऐसा नहीं होना चाहिए। जांच रिपोर्ट पुलिस को जल्द मिले, ताकि कार्रवाई में अनावश्यक विलंब न हो।