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सूर्य ग्रहण कल, जानें क्या होगा असर, बरतें ये सावधानी

नई दिल्ली। ज्योतिष में ग्रहण का विशेष महत्व माना गया है. साल का पहला सूर्यग्रहण 16 फरवरी को लगा था. इस बार सूर्यग्रहण 13 जुलाई को लग रहा है.

भारतीय समय के अनुसार, यह प्रातः  07.18 से शुरू होकर प्रातः 09.43 तक समाप्त होगा. इस ग्रहण की कुल अवधि लगभग 02 घंटे 25 मिनट की है. यह आंशिक सूर्यग्रहण तो है, परन्तु भारत में दर्शनीय नहीं है.

यह ग्रहण आंशिक सूर्यग्रहण है. यह ग्रहण ज्यादातर दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक और हिन्द महासागर में दर्शनीय होगा. भारत और पड़ोसी देशों में इसका दर्शन नहीं होगा. चूँकि इसका दर्शन नहीं होगा, अतः सूतक आदि के नियम लागू नहीं होंगे. सूर्य के विशेष रूप से प्रभावित होने के कारण इसका असर राशियों पर होगा जो लगभग 15 दिनों तक बना रहेगा.

इस अवधि में मंत्र जाप और ध्यान करना सर्वोत्तम होता है. ग्रहण के दौरान कुंडली के अशुभ योगों को भी समाप्त किया जा सकता है. विशेषकर ऐसे योग जो राहु केतु या सूर्य से सम्बन्ध रखते हों. ग्रहण काल के बाद पवित्र नदी में या शीतल जल से स्नान करना चाहिए. इसके बाद अन्न, वस्त्र और धन का दान करना चाहिए. ग्रहण काल में ध्यान और जप सबसे ज्यादा लाभदायक होता है.

अगर कुंडली में राहु या केतु कोई अशुभ योग बना रहे हों. शनि या सूर्य के कारण कोई अशुभ योग बन रहा हो. कोई अज्ञात दोष बना हुआ हो. बार बार काम में रुकावट आ रही हो तो इसके लिए ग्रहण पर उपाय कर सकते हैं.

ग्रहण काल के पूर्व स्नान कर लें. पहले आँखें बंद करके सूर्य का ध्यान करें. फिर सूर्य के इक्कीस नाम लें, ये नाम हैं - विकर्तन , विवस्वान , मार्तण्ड , भास्कर , रवि , लोकप्रकाशक , श्रीमान , लोकचक्षु , गृहेश्वर , लोकसाक्षी , त्रिलोकेश , कर्ता , हर्ता , तमिस्त्रहा , तपन , तापन , शुचि , सप्ताश्ववाहन , गभस्तिहस्त , ब्रह्मा , सर्वदेवनमस्कृत
ग्रहण काल के बाद पुनः स्नान करें. इसके बाद गुड, गेंहू और ताम्बे के बर्तनों का दान करें. आपकी कुंडली के दुर्योग समाप्त होंगे।