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अंग्रेजों की पूरी रेजीमेंट से भिड़ गए थे ग्वालियर के 6 हजार मराठा

मुरैना। 1857 क्रांति से करीब 14 साल पहले ग्वालियर राज्य के 6 हजार मराठाओं ने अपनी आजादी की रक्षा के लिए अंग्रेजों की पूरी रेंजीमेंट से लोहा लिया था। इस युद्ध में मराठों की हार हुई, लेकिन अंग्रेजी फौज के 3 बड़े सैन्य अधिकारियों को मार गिराया गया। इनमें 1815 के वाटरलू युद्ध का नायक अंग्रेज अधिकारी मेजर जनरल चर्चिल भी शामिल था। इस युद्ध को इतिहास के पन्ने में महाराजपुर-छौंदा आंग्ल-मराठा युद्ध के नाम से दर्ज किया गया। यह जगह मुरैना मुख्यालय से महज 2 किमी दूर नेशनल हाइवे पर स्थित है। यहां बना एक अंग्रेज स्मारक आजादी के बाद मराठों की बलिदान भूमि के नाम से मशहूर हो गया।

इतिहासकार कल्याण कुमार चक्रवर्ती की पुस्तक ग्वालियर फोर्ट में उल्लेख मिलता है कि साल 1804 में ग्वालियर किले को लॉर्ड वैलेजली ने मराठों से छीन लिया था। इसके बाद किले पर प्रशासक के तौर पर जनरल हैनरी व्हाइट की नियुक्ति कर दी गई। कुछ समय बाद एक संधि के तहत किला वापस मराठा महाराज दौलतराव सिंधिया को दे दिया गया। उनकी मृत्यु के बाद जानकोजी राव राजा बने। दुर्भाग्य से वे भी चल बसे। इतिहासविद् प्रोफेसर डॉ. मधुबाला कुलश्रेष्ठ के मुताबिक जानकोजी राव की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ताराबाई ने संतान न होने के कारण 8 साल के भागीरथ राव (जो जयाजी राव के नाम से प्रसिद्ध हुए) को गोद लिया। ग्वालियर को असहाय पाकर अंग्रेजों ने किले पर फिर अपनी नजर गड़ाई। डॉ. कुलश्रेष्ठ के मुताबिक दिसंबर 1843 को अंग्रेजों ने सैन्य अभ्यास के नाम पर मुरैना के हिंगौना में अपनी पूरी रेजीमेंट तैनात कर दी। एक रात अचनाक अंग्रेज आर्मी मुरैना के छौंदा गांव तक आ गई।


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 आधी रात को अंग्रेजों पर टूट पड़े 6 हजार मराठा घुड़सवार -

इतिहासविद् भवानी प्रसाद के मुताबिक छौंदा तक आ चुके अंग्रेजी संकट से निबटने के लिए आधी रात को मराठा राज्य की 14वीं बटालियन के 6 हजार घुड़सवार 60 तोपों के साथ चुपके से अंग्रेज शिविर तक पहुंच गए। यहां उनका सामाना अंग्रेजों की 39वीं पैदल रेजीमेंट से होना था। मराठो ने अंग्रेजी बारूद में पानी और अंगूर मिला दिए। अंग्रेजों का तोप खाना बर्बाद हो जाने के बाद मराठों ने शिविर पर धावा बोल दिया।

जनरल चर्चिल मारा गया, 3 हजार मराठे हुए थे शहीद -

इस युद्ध में अंग्रेजों की विशाल फौज के हाथों 3 हजार मराठाओं को वीरगति प्राप्त हुई। लेकिन मराठाओं ने भी यहां 797 अंग्रेज फौजियों को मार गिराया। इस लड़ाई में हीरो ऑफ वाटर लू(1815)के खिताब से नवाजे गए मेजर जनरल चर्चिल सहित, कर्नल सेंडर्स और कर्नल एलिन भी मारे गए। इतनी बड़ी कुर्बानी के बाद भी मराठों को ग्वालियर किला हार जाना पड़ा था।