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आठ दिन की नवरत्रि में पांच बार रवि और एक बार सर्वार्थसिद्धि योग

उज्जैन। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्रि 10 अक्टूबर बुधवार को बुध चित्रा योग में आरंभ होगी। सालों बाद देवी आराधना का पर्वकाल दुर्लभ संयोगों से युक्त है।

ज्योतिषियों के अनुसार आठ दिन की नवरत्रि में पांच बार रवि और एक बार सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग बन रहा है। खास बात यह भी है कि नवरात्रि की घट स्थापना बुधवार के दिन होगी। वहीं महाअष्टमी भी बुधवार के दिन रहेगी।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया कि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर बुधवार को शारदीय नवरात्र का आरंभ हो रहा है। इस दिन चित्रा नक्षत्र की साक्षी रहेगी। बुध चित्रा नक्षत्र में शुरू हो रही नवरात्रि साधना की सिद्धि तथा कार्य में प्रगति देने वाली मानी गई है।

पंचागीय गणना से देखे तों नवरात्रि में द्वितीया तिथि का क्षय बताया गया है। इस कारण नवरात्रि आठ दिन की रहेगी। 17 सितंबर को महाअष्टमी बुधवार के दिन रहेगी। 18 सितंबर को महानवमी रहेगी।

इसी दिन दोपहर 3.42 बजे बाद दशमी तिथि लग जाएगी। देवी आराधना का पर्व काल साधना, सिद्धि, आराधना के साथ खरिदारी के लिए भी खास है। रवियोग में सोने,चांदी के आभूषण, वाहन, भूमि, भवन खरीदना विशेष शुभफल प्रदान करेगा। निवेश के लिए भी यह नवरात्रि विशेष मानी जा रही है।

कब-कब रवि व सर्वार्थ सिद्धि

-10 अक्टूबर प्रतिपदा रवियोग

-12 अक्टूबर चतुर्थी रवियोग

-13 अक्टूबर पंचमी रवियोग

-14 अक्टूबर षष्ठी रवि तथा सर्वार्थसिद्धि योग

-15 अक्टूबर सप्ती रवियोग

एक पक्ष काल में यह योग भी खास

अश्विन मास के शुक्ल पक्ष में तीन बुधवार खास है। पक्षकाल के पहले दिन प्रतिपदा पर बुधवार, नवरात्रि की महाअष्टमी भी बुधवार तथा पक्षकाल के समापन पर शरदपूर्णिमा के दिन भी बुधवार ही रहेगा। ऐसे में कोजागिरी पूर्णिमा पर महालक्ष्मी व गणेश की आराधना सुख व स्थाई समृद्धि प्रदान करेगी।