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Ambedkar Jayanti 2019: धारा 370 को लेकर ऐसे थे आंबेडकर के विचार, जानिये उनसे जुड़ी 9 अनजानी बातें

आज रविवार को संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की 128 वीं जयंती है। वे किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे देश में सबसे अधिक आरक्षण को लेकर जाने जाते हैं लेकिन आरक्षण को लेकर वर्गों के आपसी मतभेद होने के बावजूद, बाबा साहेब की मेधा, प्रतिभा, व्‍यक्तित्‍व की गहराई, विपुल अध्‍ययन और दूरदर्शिता जैसे गुणों को लेकर सभी एकमत हैं। उनकी क्षमताओं और योग्‍यता को लेकर किसी को संदेह नहीं है। आइये आपको उनके बारे में कुछ अनजाने, रोचक तथ्‍य बताते हैं जिनके बारे में जानकर आपको हैरानी भी हो सकती है और इस संविधान पुरुष पर गर्व भी।

भारतीय श्रम सम्मेलन के 7 वें सत्र में, अम्बेडकर ने भारत में काम के घंटों की संख्या को 14 घंटे से बदलकर 8 घंटे कर दिया था, इसलिए, अगर वे नहीं होते, तो आज हमारा औसत कार्य दिवस सुबह 9 से रात 11 बजे तक का होगा।

वर्ष 1955 में आंबेडकर ने बेहतर शासन के लिए मध्य प्रदेश और बिहार दोनों राज्‍यों के विभाजन का सुझाव दिया था। इसके ठीक 45 साल बाद राज्यों का विभाजन किया गया, जिससे छत्तीसगढ़ और झारखंड बना।

आंबेडकर का मूल नाम अंबावडेकर था, लेकिन उनके शिक्षक ने स्कूल के रिकॉर्ड में उनका नाम बदलकर आंबेडकर’ कर दिया। 'आंबेडकर' शिक्षक का स्‍वयं का ही उपनाम था। असल में, वे शिक्षक आंबेडकर को बहुत पसंद करते थे।

वर्ष 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना में भी आंबेडकर ने अहम भूमिका निभाई थी। उनकी पुस्तक द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी - इट्स ओरिजिन एंड इट्स सॉल्यूशन ’ में आरबीआई के गठन के दौर को व्यापक रूप से संदर्भित किया गया था।

आंबेडकर ने भारत में विशाल बांधों की तकनीक को विकसित करने में भी खासा योगदान दिया है। उन्होंने दामोदर, हीराकुंड और सोन नदी बांध परियोजनाओं को स्थापित करने में भूमिका निभाई। आंबेडकर की आत्मकथा, 'वेटिंग फॉर ए वीजा' का उपयोग कोलंबिया विश्वविद्यालय में एक पाठ्यपुस्तक के रूप में किया जाता है। इसे उन्होंने 1935-36 के दौरान लिखा था।

आंबेडकर ने राष्ट्रीय रोजगार विनिमय एजेंसी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस बात से हमें पता चलता है कि भविष्‍य के संकटों को दूर करने की दिशा में उनकी अभूतपूर्व क्षमता थी।

एक महान राजनेता होने के बावजूद, अम्बेडकर बहुत सफल राजनीतिज्ञ नहीं कहे जा सकते हैं। इसकी वजह ये हो सकती है कि उनके लिए देश का स्‍थान राजनीति से कहीं अधिक ऊंचा था। उन्‍होंने वर्ष 1952 में बॉम्बे नॉर्थ से लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस उम्मीदवार नारायण काजरोलकर से हार गए। यह तथ्‍य आपको जानने में रोचक लग सकता है कि बाबा साहेब आंबेडकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के विरोधी थे, जो कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है।