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जम्मू-कश्मीर के दो जिलों में होगी 4G इंटरनेट की बहाली, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

पिछली सुनवाई में सरकार से कोर्ट ने पूछा था कि क्या कुछ इलाकों में इंटरनेट बहाल किया जा सकता है? कोर्ट ने ये भी साफ किया था कि मामले में सुनवाई को अब टाला नहीं जाएगा.

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में 4G इंटरनेट बहाल करने के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट से केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के दो जिलों में हाई स्पीड इंटरनेट बहाली की बात कही है. केंद्र ने कहा, 15 अगस्त के बाद 2 जगहों में प्रायोगिक तौर पर फुल स्पीड इंटरनेट शुरू होगा, पाकिस्तान सीमा से दूर ऐसी जगह जहां बहुत कम आतंकवादी घटनाएं हुई हैं. सरकार ने कोर्ट को ये भी बताया कि रिव्यू कमिटी ने पाया है कि ज्यादातर हिस्सों में हालात इंटरनेट बहाली के लिए सही नहीं है.

न्यायमूर्ति एन वी रमन, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने गैर सरकारी संगठन फाउण्डेशन फॉर मीडिया प्रफेशनल की अवमानना याचिका संक्षिप्त सुनवाई के बाद 11 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की थी. याचिका में कहा गया है कि 11 मई को कोर्ट ने इंटरनेट बहाली पर फैसला लेने के लिए उच्चस्तरीय कमिटी बनाने का आदेश दिया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. जबकि सरकार ने बताया है कि कमिटी गठित की जा चुकी है.

पिछली सुनवाई में क्या हुआ था
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जोर देकर कहा था कि अब इस मामले में और ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए. न्यायमूर्ति एन.वी. रमना, न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की पीठ ने सॉलिस्टिर जनरल तुषार मेहता से कहा था, "जो निर्णय लिया गया, उसका आधार क्या है. क्या इस बात की संभावना है कि कुछ क्षेत्रों में 4जी सेवा को बहाल किया जा सकता है? क्या ऐसा कुछ है, जो कुछ किया जा सके?"

इसके जवाब में, "मेहता ने कहा कि मामले में समीक्षा के लिए निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है. क्योंकि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को बदल दिया गया है. हमें आदेश प्राप्त करने के लिए और प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए समय की जरूरत है." शीर्ष अदालत ने मेहता से कहा कि मामले को फिर से टालने का कोई मतलब नहीं है. साथ ही अदालत ने कहा कि अटॉर्नी जनरल को मामले की अगली सुनवाई के वक्त केंद्र का पक्ष निश्चित ही रखना चाहिए.

 

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