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हंसाकर फैंस को रूलाकर चले गए जगदीप, आज मुंबई में किया जाएगा सुपुर्द-ए-खाक

बॉलीवुड के जाने-माने कॉमिडियन और एक्टर जगदीप बुधवार को इस दुनिया को अलविदा कह गए. बुधवार को उनके आवास पर निधन हो गया. बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे दक्षिण मुंबई के कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा.

मुंबई। बॉलीवुड के जाने-माने कॉमिडियन और एक्टर जगदीप बुधवार को इस दुनिया को अलविदा कह गए. बुधवार को उनके आवास पर निधन हो गया. वे 81 वर्ष के थे. परिवार के करीबी मित्र निर्माता महमूद अली ने बताया, ' उनका बांद्रा के अपने आवास पर रात साढ़े आठ बजे निधन हो गया. आयु संबंधी समस्याओं के कारण वह अस्वस्थ थे.' साथ ही उन्होंने बताया कि अभिनेता को बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे दक्षिण मुंबई के कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा. आपको बता दें कि उनके परिवार में दो बेटे जावेद और नावेद जाफरी हैं. उनकी एक बेटी भी है जिसका नाम मुस्कान है.

पहले डायलॉग से ही जीत लिया था दिल

जगदीप ने वर्ष 1951 में फिल्म 'अफसाना' से अपनी सिने यात्रा की शुरुआत की थी, जिसके जरिए दिग्गज फिल्म निर्माता बीआर चोपड़ा ने निर्देशन में कदम रखा था. उन्हें इस किरदार के लिए तीन रुपये बतौर मेहनताना दिए जाने का वादा किया गया था लेकिन एक डायलॉग के बाद इस राशि को दोगुना कर दिया गया था. जगदीप ने अभिनय के शुरुआती दिनों में छोटे-बड़े सभी तरह के किरदार अदा किए. अपनी कला से उन्होंने बिमल रॉय जैसे निर्देशकों को भी प्रभावित किया. जिन्होंने वर्ष 1953 में फिल्म 'दो बीघा जमीन' में जगदीप को जूते पॉलिश करने वाले लालू उस्ताद की भूमिका निभाने का मौका दिया.

पिता के निधन के बाद छोड़ दी थी पढ़ाई

जगदीप का जन्म ब्रिटिश इंडिया के दतिया सेंट्रल प्रोविंस में (अब मध्य प्रदेश) 29 मार्च 1939 को हुआ था. उनका असली नाम सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी था. उनके पिता का नाम सैयद यावर हुसैन जाफरी था और मां का नाम कनीज़ हैदर. बचपन में ही जगदीप के सिर से पिता का साया उठ गया. पिता के निधन और 1947 में देश के बंटवारे के बाद परिवार में पैसों की तंगी आने लगी. यही वजह थी कि उनकी मां परिवार के साथ मुंबई आ गईं. मुंबई में जगदीप की मां कनीज़ हैदर घर चलाने के लिए एक अनाथालय में खाना बनाने का काम करने लगीं. बच्चे को स्कूल भेजने के लिए मां ने पाई पाई बचाना शुरू किया. लेकिन मां को इतनी मेहनत करता देख जगदीप ने स्कूल छोड़ने का फैसला कर लिया. और सड़कों पर सामान बेचने लगे.

'शोले' ने दिलाई अलग पहचान

जगदीप ने करीब 400 फिल्मों में काम किया लेकिन 1975 में आई फिल्म शोले के सूरमा भोपाली के उनके किरदार को प्रशंसक आज भी याद करते हैं. उनका डायलॉग 'हमारा नाम सूरमा भोपाली ऐसे ही नहीं है' काफी मशहूर हुआ. उन्होंने 'पुराना मंदिर' नाम की एक भुतिया फिल्म में भी अभिनय किया और 'अंदाज अपना अपना' में सलमान खान के पिता का यादगार किरदार निभाया.

बॉलीवुड में शोक की लहर

जगदीप के निधन के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर छा गई है. अजय देवगन, मनोज बाजपेयी, जॉनी लीवर और निर्देशक हंसल मेहता ने जगदीप को सोशल मीडिया पर याद कर उन्हें श्रद्धाजंलि दी.

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