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ब्रिटेन में एक हफ्ते में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट के 35 हजार से ज्यादा केस मिले

कोरोना वायरस के लैंब्डा वेरिएंट (सी.37) को जांच की सूची में शामिल किया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 जून को लैंब्डा स्वरूप को ‘वैरियंट ऑफ इंट्रेस्ट’ के तौर पर रखा था.

लंदन। कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट ( Delta Variant) ने ब्रिटेन में तबाही मचा रखी है. यहां पिछले एक हफ्ते के दौरान कोरोना के डेल्टा वेरिएंट से 35,204 लोग संक्रमित पाए गए हैं. इसके साथ ही यहां वायरस के इस वेरिएंट से संक्रमितों की कुल संख्या 1,11,157 हो गई है. अधिकारियों ने शुक्रवार को साप्ताहिक आंकड़े जारी करते हुए बताया कि एक सप्ताह में डेल्टा वेरिएंट के मामलों में 46 प्रतिशत तक का इज़ाफा देखा गया. बता दें कि कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप की पहचान सबसे पहले भारत में हुई थी.

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) ने बताया कि कुल मामलों में से 42 मामले डेल्टा एवाई.1 सबटाइप के आए हैं, जिसे डेल्टा प्लस के नाम से भी जानते हैं और कुछ इलाकों में इसके अधिक प्रसार की आशंका है. पीएचई ने बताया कि पूरे ब्रिटेन में किए गए वायरस के जिनोम सिक्वेंसिंग में करीब 95 मामले डेल्टा वेरिएंट के हैं. हालांकि कोरोना के टीके की दोनों खुराकों के बाद अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज़ों की संख्या बेहद कम है.

टीकाकरण से बचाव
ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी की प्रमुख कार्यकारी डॉ. जेनी हैरिस ने कहा, ‘आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि सफल टीकाकरण अभियान से हमने मामलों और अस्पताल में भर्ती होने के संबंधों को तोड़ना शुरू कर दिया है. यह बहुत उत्साहजनक खबर है, लेकिन हम लापरवाह नहीं हो सकते. टीके की दो खुराक एक खुराक के मुकाबले कोविड-19 के खिलाफ कहीं अधिक कारगर है. इसलिए आप सुनिश्चित करें कि जैसे ही दूसरी खुराक के लिए बुलाया जाए, आप उसे लेने आएं. टीका बेहतरीन सुरक्षा देता है लेकिन पूरी तरह से रक्षा नहीं करता है. इसलिए जरूरी है कि सतर्कता बरती जाए.’

अब लैंब्डा वेरिएंट का खतरा
इस बीच, पीएचई ने कहा कि उसने वायरस के लैंब्डा वेरिएंट (सी.37) को बुधवार को जांच की सूची में शामिल किया है, ऐसा अंतरराष्ट्रीय विस्तार और एल452क्यू और एफ490एस जैसे कई बदलाव की वजह से किया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 जून को लैंब्डा स्वरूप को ‘वैरियंट ऑफ इंट्रेस्ट’ के तौर पर रखा था. ब्रिटेन में लैंब्डा स्वरूप से संक्रमण के अबतक छह मामले सामने आए है और इन सभी का संबंध विदेश यात्रा से है. सबसे पहले इसकी पहचान पेरु में की गई थी और अबतक 26 देशों में यह मिल चुका है. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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