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चीन के राजदूत बोले: गलवां में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण, समृद्धशाली इतिहास इसे नजरअंदाज करेगा

लद्दाख की गलवां घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुए हिंसक झड़प को बीते दो महीने से ज्यादा वक्त हो गया है, लेकिन इस झड़प के बाद भारत और चीन के बीच बिगड़े रिश्ते अभी तक खुद के सामान्य होने का समय ढूंढ रहे हैं। वहीं, अब भारत में चीन के राजदूत सुन वेदोंग ने गलवां घाटी की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। 

नई दिल्ली। चीनी राजदूत ने कहा, गलवां घाटी में हिंसक झड़प की घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने इस घटना को इतिहास के संदर्भ से संक्षिप्त लम्हा करार दिया है। वेदोंग ने कहा, दोनों ही देश बातचीत के जरिए तनाव की इस स्थिति को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। 

'चीन-भारत यूथ वेबिनार' में बोलते हुए चीनी राजदूत ने कहा, 'हाल ही में, सीमावर्ती क्षेत्रों में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी जिसे न तो चीन और न ही भारत याद रखना पसंद करेगा। अब हम बिगड़े रिश्तों को ठीक करने के लिए काम कर रहे हैं। यह इतिहास के परिप्रेक्ष्य से एक संक्षिप्त क्षण है।'

वेदोंग ने कहा, 70 साल पहले चीन और भारत के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में कई बार उतार चढ़ाव आए, लेकिन दोनों ही देशों के संबंध लचीले हो गए। उन्होंने कहा, एक समय में एक घटना से रिश्ते नहीं बिगड़ने चाहिए। इस नई सदी में, द्विपक्षीय संबंधों को कम करने के बजाय आगे बढ़ाने पर जोर होना चाहिए। चीनी राजदूत ने भरोसा जताया कि भारत और चीन के पास द्विपक्षीय संबंधों को ठीक से संभालने की समझदारी और क्षमता है।

वेदोंग ने कहा, चीन भारत को एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं देखता है ना ही वह इसे खतरे के रूप में देखता है। बीजिंग नई दिल्ली को एक अवसर के रूप में देखता है। उन्होंने कहा, हम द्विपक्षीय संबंधों में एक उचित स्थान पर सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों को रखने की उम्मीद करते हैं। बातचीत और परामर्श के माध्यम से मतभेदों को दूर करने और द्विपक्षीय संबंधों को पहले की स्थिति में लाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, भारत और चीन को विवादों को किनारे कर शांतिपूर्वक रहना चाहिए। कोई भी देश दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग-थलग नहीं हो सकता है और न ही विकास कर सकता है। हमें न केवल आत्मनिर्भरता का पालन करना चाहिए, बल्कि वैश्वीकरण की प्रवृत्ति के अनुरूप बाहरी दुनिया के लिए भी खुलकर रहना चाहिए। केवल इस तरह से हम बेहतर विकास हासिल कर सकते हैं। 

चीनी राजदूत ने जोर देकर कहा कि चीन और भारत के बीच आर्थिक पूरकता बहुत मजबूत है। उन्होंने कहा, चीन लगातार कई वर्षों तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है, जबकि भारत दक्षिण एशिया में चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है। चीनी और भारतीय अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। 

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