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कोरोना वायरस : क्या है भीलवाड़ा मॉडल? अगर कोई शहर या जिला बना हॉटस्पॉट तो ये मॉडल हो सकता है कारगर

नई दिल्ली। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में हर संभव प्रयास जारी है. देश की सरकार ने जनता कर्फ्यू़ से लेकर संपूर्ण लॉकडाउन जैसे उपायों को अपनाया मगर इसके बावजूद भी कोरोना के पॉजिटिव मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है. केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक संक्रमित मरीजों की संख्या 5 हजार 194 पहुंच गई है. इनमें से 402 लोग ठीक हुए हैं, जबकि 149 लोगों की मौत हो चुकी है. बड़ी बात यह है कि पिछले 24 घंटों में 35 लोगों की मौत और संक्रमण के 773 मामले सामने आए हैं. महाराष्ट्र में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा एक हजार के पार पहुंच गया है. राज्य में सबसे ज्यादा 64 लोगों की मौत हुई है.

कोरोना ने निपटने के लिए राज्य सरकारें तमाम कोशिश कर रही हैं मगर इस महामारी को फैलने से रोका नहीं जा रहा है. ऐसे में राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में जिला प्रशासन की मुस्तैदी और नीयमों के कठोर पालन की बदौलत शहर में कोरोना के संक्रमण पर फिलहाल काबू पा लिया गया है. कोरोना वायारस को देखते हुए शहर में लागू इस नीयम को 'भीलवाड़ा मॉडल' नाम दिया जा रहा है, जिसे केंद्र भी अपनाने की मंशा जाहिर कर चुका है.

केंद्र हॉटस्पॉट के रूप में पहचाने जाने वाले क्षेत्रों में नए कोरोनो वायरस के प्रसार पर अंकुश लगाने की रणनीति के रूप में भीलवाडा मॉडल को अपना सकता है. कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने रविवार को मुख्य सचिवों के साथ बैठक में भीलवाड़ा मॉडल को एक प्रभावी नियंत्रण रणनीति के रूप में स्वीकार किया.

भीलवाड़ा शहर राजस्थान में कोरोना वायरस का एक हॉटस्पॉट था, जहां जिला प्रशासन द्वारा किए गए आक्रामक रोकथाम और उपायों के जरिए वायरस के संक्रमण को सीमित कर दिया गया है.

क्या है भीलवाड़ा मॉडल?

भीलवाड़ा में एक डॉक्टर के कोरोना संक्रमित होने के वजह से पूरे शहर में कोरोना पॉजिटिव की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई थी. मरीजों की संख्या 27 तक पहुंच गई थी मगर ये संख्या अब स्थिर है. 27 मरीजों में 17 ठीक हो चुके हैं, जिनमें नौ लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. कोरोना के मरीज की पॉजिटिव पाए जाने के बाद ही जीले की सीमाएं सील कर दी गईं थी. सभी निजी अस्पतालों और होटलों का फिलहाल प्रशासन के द्वारा अभिगृहण कर लिया गया है. इसके अलावा घर-घर में स्क्रीनिंग की फैसेलिटी दी जा रही हैं. शहर के अंदर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और यहां तक कि मीडिया के आने पर भी रोक लगा दी गई है. शहर के अंदर प्रशासन और पुलिस के चंद अधिकारी ही नजर आ रहे हैं.

जिले में 17 दिन से कर्फ्यू लागू है, साथ पिछले तीन दिनों से महा कर्फ्यू का सख्ती के पालन हो रहा है. लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग पा पालन करवाने पर जोर दिया जा रहा है. पुलिस की तरफ से घरों में कच्चे जरूरती सामान मुहैया कराया जा रहा है. जिन गरीब लोगों को खाने की जरूरत है उनके लिए भोजन की व्यवस्था की जा रहा है.

 

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