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किसान आंदोलन : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जारी किसान आंदोलन, आज लोहड़ी पर जलाएंगे तीनों कानून की कॉपी

Farmers Protest Live Updates: किसान आंदोलन का आज 49वां दिन है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है. दिल्ली के अलग अलग बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान आज शाम को कृषि कानूनों की कॉपी जलाकर लोहड़ी मनाएंगे. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगाते हुए चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किसानों ने कहाल कि वे किसी भी कमेटी के पास नहीं जाएंगे. किसानों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के दिन देशभर के किसान दिल्ली पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से "किसान गणतंत्र परेड" आयोजित करे गणतंत्र का गौरव बढ़ाएंगे. इसके साथ साथ अदानी अंबानी के उत्पादों का बहिष्कार करने और भाजपा के समर्थक दलों पर दबाव डालने के हमारे कार्यक्रम बदस्तूर जारी रहेंगे. तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द करवाने और एमएसपी की कानूनी गारंटी हासिल करने के लिए किसानों का शांति पूर्वक एवं लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा.

किसान नेताओं ने कहा कि वे 15 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में शामिल होंगे. संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित आंदोलन के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं है. आज लोहड़ी पर तीनों कानूनों को जलाने का कार्यक्रम, 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाने, 20 जनवरी को श्री गुरु गोविंद सिंह की याद में शपथ लेने और 23 जनवरी को आज़ाद हिंद किसान दिवस पर देश भर में राजभवन का घेराव करने का कार्यक्रम जारी रहेगा.

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने गतिरोध तोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति को मंगलवार को मान्यता नहीं दी और कहा कि वे समिति के सामने पेश नहीं होंगे और अपना आंदोलन जारी रखेंगे. सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य सरकार समर्थक हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अगले आदेश तक विवादास्पद कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी. इसके साथ ही केंद्र और दिल्ली की सीमाओं पर कानून को लेकर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के बीच जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया.

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहा, ''सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित समिति के सदस्य विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि वे लिखते रहे हैं कि कृषि कानून किसानों के हित में है. हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे. किसान नेता ने कहा कि संगठनों ने कभी मांग नहीं की कि सुप्रीम कोर्ट कानून पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करे.'' उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे केंद्र सरकार का हाथ है. उन्होंने कहा कि हम सैद्धांतिक तौर पर समिति के खिलाफ हैं. प्रदर्शन से ध्यान भटकाने के लिए यह सरकार का तरीका है.

सरकार के साथ होने वाली बैठक में शामिल होंगे किसान
बहरहाल, किसान नेताओं ने कहा कि वे 15 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में शामिल होंगे. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई चार सदस्यों की समिति में बीकेयू के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष अनिल घनवत, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान दक्षिण एशिया के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं.

घोषित आंदोलन के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित आंदोलन के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं है. आज लोहड़ी पर तीनों कानूनों को जलाने का कार्यक्रम, 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाने, 20 जनवरी को श्री गुरु गोविंद सिंह की याद में शपथ लेने और 23 जनवरी को आज़ाद हिंद किसान दिवस पर देश भर में राजभवन का घेराव करने का कार्यक्रम जारी रहेगा.

गणतंत्र दिवस पर "किसान गणतंत्र परेड" का होगा आयोजन
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के दिन देशभर के किसान दिल्ली पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से "किसान गणतंत्र परेड" आयोजित करे गणतंत्र का गौरव बढ़ाएंगे. इसके साथ साथ अदानी अंबानी के उत्पादों का बहिष्कार करने और भाजपा के समर्थक दलों पर दबाव डालने के हमारे कार्यक्रम बदस्तूर जारी रहेंगे. तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द करवाने और एमएसपी की कानूनी गारंटी हासिल करने के लिए किसानों का शांति पूर्वक एवं लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा.
हरियाणा और पंजाब सहित देश के विभिन्न हिस्सों के किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं और तीनों कानूनों को वापस लेने तथा अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी की मांग कर रहे हैं.

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