Follow us:

ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के मझधार में जन्माष्टमी पर नहीं सजेगी मटकी

खंडवा। भगवान शिव की नगरी ओंकारेश्वर में इस बार अष्टमी पर मां नर्मदा के मझधार में अनोखी मटकी नहीं सज सकेगी। इसके साथ ही गोविंदा की तलाश भी अधूरी रह जाएगी। यह स्थिति कोरोना की वजह से आयोजनों पर प्रतिबंध से बनी है। वैसे पिछले साल भी ओंकारेश्वर बांध के गेट खुले रहने से मटकी फोड़ प्रतियोगिता नहीं हो सकी थी। लगातार दो वर्षों से कृष्ण जन्माष्टमी पर मटकी फोड़ने का आयोजन नहीं होने से आयोजक व गोपाला मायूस हैं।

नाविक संघ के अध्यक्ष कैलाश भंवरिया ने बताया कि 27 वर्षों से जन्माष्टमी पर मटकी फोड़ कार्यक्रम अाठ से 10 दिन तक चलता है। मां नर्मदा के बीच में बांधी जाने वाली इस मटकी को फोड़ने के लिए अन्य जिलों व प्रांतों से भी गोविंदा और इस अनोखी प्रतियोगिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग दूर-दूर से आते हैं।

नर्मदा में 30 फीट ऊपर बांधते हैं मटकी

तीर्थनगरी के ब्रह्मपुरी और विष्णुपुरी क्षेत्र की पहाड़ी के बीच लगभग 300 मीटर लंबा रस्सा नर्मदा नदी में बांधा जाता है। गौमुखघाट के समक्ष 30 फीट ऊपर नर्मदा नदी में माखन की मटकी लटकाकर कौन बनेगा कन्हैया (गोपाला) प्रतियोगिता का आयोजन होता है। नाविक संघ ओकारेश्वर द्वारा इस अनूठी मटकी प्रतियोगिता का आयोजन 27 वर्षों से किया जा रहा है। नगर परिषद के सीएमओ अखिलेश डोंगरे ने बताया कि प्रशासन ने सामूहिक आयोजन और कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया है। मटकी फोड़ कार्यक्रम को अनुमति देना संभव नहीं है।

किस्मत वाले पहुंचते हैं मटकी तक

इस अनूठी मटकी फोड़ प्रतियोगिता में भाग लेने वाले गोविंदा 200 से 300 मीटर तक रस्से पर हाथों के सहारे झूलते हुए आगे बढ़ते हैं। मटकी तक किस्मत वाला गोपाल ही पहुंच पात है। नाविक संघ अध्यक्ष भंवरिया ने बताया कि प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में युवा शामिल होते हैं। कोई 30 फीट तक नर्मदा नदी में तैरकर रस्से तक तो कोई नर्मदा नदी के बीच रस्से पर लटक कर मटकी तक पहुंचने का प्रयास करता है। रस्सी से छूटने के बाद किसी गोविंदा के नर्मदा में गिरते ही गोविंदा गयो नर्मदा में... कान्हा गयो नर्मदा में... गूंजने लगता है। 5100 रुपये की शुरूआती इनाम राशि बढ़ते हुए 51 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। उत्साह, साहस और आस्था से लबरेज इस प्रतियोगिता में गोविंदाओं के साथ ही दर्शकों का मन उल्लास से भर जाता है।

 

Related News