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आदिवासियों की भूमि अधिग्रहण को लेकर मध्यप्रदेश में भी जयस व बिरसा ब्रिगेड और Acs ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा

गुजरात के केवड़िया में सौंदर्यीकरण ओर विकास व स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के नाम पर आदिवासियों के साथ हो रहा अन्याय

बड़वानी। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने गुजरात के केवड़िया में अनुसूचित क्षेत्रों में बिना ग्राम सभा की अनुमति के “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” स्टेच्यू ऑफ यूनिटी एरिया डेवलोपमेन्ट एंड टूरिस्म गवर्नेंस 2019 के नाम पर भूमि असंवैधानिक क़ानून के द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में असंवैधानिक गुजरात पुलिस एक्ट 1951 तथा सीआरपीसी 1898 के अधीन गुजरात पुलिस कार्यवाही कर भूमि अधिग्रहण पर तत्काल रोक की मांग कर, राष्ट्रपति के नाम पानसेमल तहसीलदार राकेश सस्तिया को बिरसा ब्रिगेड के राष्ट्रीय प्रवक्ता चेतन पटेल ने कार्यकर्ताओं के साथ ज्ञापन सौंपा, डॉ. विरसिंग बर्डे ने बताया कि असवैधानिक पुलिस बल को तत्काल हटाया जाए, केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति पूरे भारत का आदिवासी समुदाय विचलित और आक्रोशित है, और युवा साथी इंदौर शहर Acs अनिल खेड़कर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की समता जजमेंट 1997 के आदेश अनुसार सभी राज्य के राज्यपालों की अनुसूचित के हितों के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने वर्ष 2009 में राज्यपालों की मीटिंग बुलाई थी, इसके अनुसूचित जन जाती द्वारा तथा अटिनो जनरल की रिपोर्ट के अनुसार नेशनल कमीशन फ़ॉर स्पेशल रिपोर्ट बनाई गई, इसमें 1950 में लेकर अभी तक बनाये गए सभी सामान्य तथा पुराने कानूनों की समीक्षा करके सविधान के अनुछेद 338 क 9 केतहत अनुसूचित जनजाति के हितों के अनुसार कानून लागू किये जायेंगे, ज्ञापन का वाचन महेश चौहान ने किया, और आभार भारत कन्नौजे ने माना, इस दोराना रवि मेहता, रोहित चौहान, अरविंद जाधव, बादल सेनानी आदि अन्य सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता मौजूद थे।

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