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संसद सत्र : कृषि विधेयक पर राउत ने पीएम से पूछा- क्या अफवाह के चलते मंत्री ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का आज सातवां दिन है। राज्यसभा में सरकार ने कृषि से संबंधित विधेयक पेश कर दिए हैं। पुराने सहयोगी दलों की नाराजगी और किसानों के साथ विपक्ष की लामबंदी के बीच इन विधेयकों पर राज्यसभा में चर्चा और मतदान होगा। लोकसभा से पारित विधेयकों को राज्यसभा में पास करवाना सरकार के लिए चुनौती है। इसी कारण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिवसेना और एनसीपी नेताओं से फोन पर बात करके विधेयकों पर समर्थन मांगा। सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस ने विधेयक को किसानों के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा बताया। वहीं शिवसेना ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि क्या विधेयक को लेकर जारी अफवाहों की वजह से एक मंत्री ने कैबिनेट से इस्तीफा दिया है। यहां पढ़ें कार्यवाही से जुड़े सभी अपडेट्स-

बीजद ने अपने राज्यसभा सदस्यों को जारी की व्हिप
बीजू जनता दल (बीजद) ने अपने राज्यसभा सदस्यों को व्हिप जारी कर विवादित कृषि विधेयकों पर रविवार को चर्चा के दौरान सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। राज्यसभा में बीजद से मुख्य सचेतक सस्मित पात्रा ने कहा कि पार्टी सांसदों को तीन पंक्ति का व्हिप जारी कर पूरे दिन सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि बीजद सदस्यों से कहा गया कहा गया है कि राज्यसभा में उनकी उपस्थिति आवश्यक है क्योंकि आज सदन में महत्वपूर्व विधान कार्यों पर चर्चा होगी। राज्यसभा में बीजद के नौ सदस्य हैं।

सरकार आश्वासन दे कि विधेयक पारित होने के बाद किसान नहीं करेंगे आत्महत्या
शिवसेना सांसद संजय राउत ने राज्यसभा में कहा, 'क्या सरकार देश को आश्वस्त कर सकती है कि कृषि सुधार विधेयकों के पारित होने के बाद, किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी और कोई भी किसान आत्महत्या नहीं करेगा? इन विधेयकों पर चर्चा करने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए।' क्या सरकार भरोसा दे सकती है कि विधेयक पास होने के बाद किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी और आगे देश में कोई भी किसान आत्महत्या नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बताया था कि विधेयक को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है, ऐसे में मैं पूछना चाहता हूं कि क्या अफवाह पर ही एक मंत्री ने इस्तीफा दिया।

लोकसभा में आज ये मंत्री देंगे बयान
दानवे रावसाहेब दादाराव आज लोकसभा में खाद्य, उपभोक्ता मामलों और अनुदानों की मांग (2019-20) पर सार्वजनिक वितरण पर स्थायी समिति की पहली रिपोर्ट में शामिल सिफारिशों/ टिप्पणियों के कार्यान्वयन की स्थिति के बारे में बयान देंगे।

संजीव कुमार बालयान अनुदान मांगों पर कृषि संबंधी (2019-20) स्थायी समिति की चौथी रिपोर्ट में निहित सिफारिशों के कार्यान्वयन को लेकर बयान देंगे। प्रताप चंद्र सारंगी अनुदान के लिए कृषि संबंधी स्थायी समिति की पांचवी रिपोर्ट (2019-20) में शामिल सिफारिशों के कार्यान्वयन की स्थिति के बारे में बयान देंगे।

जदयू ने किया विधेयकों को समर्थन
जदयू ने कृषि विधेयकों का समर्थन किया है। पार्टी सांसद रामचंद्र सिंह ने कहा, 'बिहार 2006 में एपीएमसी अधिनियम से हटने वाला पहला राज्य था। तब से कृषि उत्पादन और खरीद एमएसपी बढ़ी है।'

विधेयकों को प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए
शिरोमणि अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल ने कृषि विधेयकों पर चर्चा के दौरान कहा, 'इन विधेयकों को एक प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए ताकि सभी हितधारकों को सुना जा सके। यह मत सोचिए कि पंजाब के किसान कमजोर हैं।'

वाईएसआर कांग्रेस ने कांग्रेस को बताया बिचौलियों की पार्टी
राज्यसभा में उस समय हंगामा हो गया जब वाईएसआर कांग्रेस सांसद वीवी रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस के पास इन विधेयकों का विरोध करने का कोई कारण नहीं है। कांग्रेस बिचौलियों की पार्टी है। इसपर कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने उनसे माफी की मांग की। इसके बाद डॉ. एल हनुमनथैया ने कहा, 'कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा।'

सरकार कृषि संस्कृति बदलना चाहती है
टीआरएस सांसद के केशव राव ने कृषि विधयकों को राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश में कृषि संस्कृति को बदलने की योजना बना रही है।

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