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बिहार चुनाव : महागठबंधन में रहेंगे या फिर जाएंगे एनडीए के साथ, आज फैसला करेंगे उपेंद्र कुशवाहा

नई दिल्ली। बिहार में अक्तूबर-नवंबर के महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा और जदयू गठबंधन को हराने के लिए बना महागठबंधन एकजुट नहीं हो पा रहा है। दरअसल, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व में बने महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का मुद्दा गरमा रहा है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) नाराज दिख रही है। पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने गुरुवार को राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी की आपातकालीन संयुक्त बैठक बुलाई है।

पटना के राजीव नगर स्थित एक कम्युनिटी हॉल में 11 बजे होने वाली इस बैठक में कुशवाहा पार्टी पदाधिकारियों को महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर अब तक हुई बातचीत की जानकारी देंगे। इसके बाद पार्टी की जो राय सामने आएगी उसपर अमल करने की घोषणा की जाएगी।

मांझी ने दी कुशवाहा को सलाह
बैठक के बाद कड़े फैसले लिए जाने की संभावना पर रालोसपा अध्यक्ष ने कहा कि वह इस बात का न तो खंडन करते हैं और न ही इसे स्वीकार करते हैं। वहीं सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन से हटकर एनडीए का हिस्सा बने जीतन राम मांझी ने कुशवाहा को प्रधानमंत्री मोदी या जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से बात करने की सलाह दी है।रालोसपा मांग रही है 35 सीटें

विधानसभा चुनाव में रालोसपा लगभग 35 सीटों की मांग कर रहा है। इसे लेकर कुशवाहा ने तेजस्वी यादव से दो बार मुलाकात की थी। इससे पहले पार्टी पदाधिकारी सूची के साथ राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद से उनके कार्यालय में मिले थे। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि महागठबंधन का सबसे बड़ा दल राजद रालोसपा को 10-12 से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है। रालोसपा नेताओं का मानना है कि यदि सीटों से ही समझौता करना है तो एनडीए बेहतर विकल्प हो सकता है।

पहले से ही कह रहे थे राजद मनमानी कर रहा है: मांझी
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी का कहना है कि हम तो पहले ही कह रहे थे कि राजद मनमानी कर रहा है। उसका अपना छुपा हुआ एजेंडा है। यह बात देर-सवेर महागठबंधन के सभी दलों को समझ आ जाएगी।

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