Follow us:

नेपाल: प्रचण्ड विरोध झेल रहे हैं पीएम ओली, गतिरोध टालने के लिए बुलाई गई बैठक एक बार फिर टली

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व पीएम पुष्पकमल दहल प्रचंड में विरोध खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. इस विवाद को सुलझाने के लिए आज एक अहम बैठक होनी थी, लेकिन एक बार फिर इसे टाल दिया गया है.

काठमांडू। नेपाल में सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के बीच जारी राजनीतिक घमासान सुलझने का नाम नहीं ले रहा है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व पीएम पुष्पकमल दहल प्रचंड में खींची तलवारों के बीच सुलह का रास्ता बनाने के लिए बुधवार सुबह बुलाई गई स्थायी समिति की बैठक को लगातार तीसरी बार टाल दिया गया है. अब यह बैठक 10 जुलाई को होगी. पार्टी के अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग के उप प्रमुख बिष्णु रिजाल ट्वीट कर बताया कि स्थाई समिति की बैठक अब शुक्रवार 10 जुलाई को सुबह 11 बजे होगी. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के प्रेस सहयोगी, सूर्य थापा ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बैठक को दो दिनों के लिए टाल दिया गया है.

पहले भी दो बार स्थगित हो चुकी है बैठक

स्थाई समिति की बैठक को लगातार तीसरी बार आगे बढ़ाए जाने के इस फैसले से साफ है कि पार्टी के दोनों अध्यक्षों, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल प्रचंड कस बीच समाधान का कोई फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है. इससे पहले, शनिवार के लिए निर्धारित बैठक सोमवार के लिए स्थगित कर दी गई थी और सोमवार की बैठक को फिर से दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था. इस समय के दौरान, दोनों अध्यक्षों के बीच सत्ता के मतभेदों को दूर करने के लिए सिलसिलेवार कई बैठकें होती रही. गौरतलब है कि फिलहाल केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष, दोनों पदों से हटने के लिए भारी दबाव में हैं. पार्टी की स्थायी समिति के अधिकांश सदस्यों ने उन्हें कोविड-19 महामारी से मुकाबले में कमज़ोर प्रतिक्रिया और ओली सरकार के मनमाने ढंग से लिए फैसलों से नाराज़ हैं.

इस्तीफा देने के लिए तैयार नहीं हैं ओली

प्रधानमंत्री ओली और प्रचण्ड के बीच पिछले सप्ताह शुक्रवार को भी दो घंटे की बैठक हुई थी. हालांकि, इसमें दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई. ओली का कहना है कि वो प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफे के अलावा सभी मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं. पार्टी में जारी तीखे अंतर्विरोध के बीच अपनी कुर्सी बचाने के पीएम ओली, अपने खिलाफ षडयंत्र और भारत पर आरोपों का कार्ड खेल रहे हैं. अंतर-पक्षीय दरार के बीच दोनों अध्यक्षों ने सोमवार को भी बैठक में अपने मतभेदों को कम करने की कोशिश की. साथ ही इस घटनाक्रम में सुलह सफाई की कवायदों में चीन की राजदूत हुवा यांक्षी ने भी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी. हलांकि, नेपाल की अंदरूनी राजनीति में चीनी राजदूत की सक्रियता और विरोध के सुर उठ रहे है.

चीनी राजदूत की सक्रियता चिंताजनक- सांसद

नेपाल में नए नक्शा जारी करने की कवायदों पर सवाल उठाने वाली सांसद सरिता गिरी ने एबीपी न्यूज़ से साक्षात्कार में यहां तक कहा कि चीनी राजदूत की सक्रियता बहुत चिंताजनक है. इसे यदि रोका न गया तो नेपाल को उत्तर कोरिया बनाने की कोशिशें कामयाब हो जाएंगी. नेपाल में राजनीतिक खींचतान और सत्ता बचाने की जुगत में ही प्रधानमंत्री ओली ने नए नक्शे का कार्ड चला था. बीते दिनों लिपुलेख, कालापानी और लिम्प्यधुरा जैसे भारतीय भूभाग को अपने इलाके में बताते हुए नया नक्शा संसद से पारित करवा कर जारी किया था. हालांकि, ओली नक्शे पर चली इस सियासत की आड़ के बाद भी आपनी कुर्सी के लिए संकट को कम नहीं कर पाए हैं.

 

Related News