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सतना में ट्रक और कार की टक्कर में पति-पत्नी व बच्चों सहित चार की मौत

सतना। जिले के मैहर थाना अंतर्गत जीतनगर के पास बीती देर रात कार व ट्रक की टक्कर में मैहर निवासी पति, पत्नी व दो बच्चे सहित चार लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार कार वाहन मालिक मैहर निवासी व्यापारी सत्य प्रकाश उपाध्याय स्वयं चला रहे थे। जिनकी घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। इनके साथ ही उनकी पत्नी और बेटी की भी मौत हो गई है। रात में बेटे को गंभीर हालत में सतना रिफर किया गया था जहां उचित उपचार न होने के कारण जबलपुर रिफर कर दिया गया था लेकिन मैहर के पास रास्ते मे ही बच्चे की मौत हो गई। यह हादसा रात 11.30 बजे के आसपास बताया जा रहा है। जब सतना से मैहर जाते वक्त जीतनगर के पास ट्रक क्रमांक यूपी 96 टी 2075 से उनकी कार की जोरदार भिड़ंत हो गई।

इनकी हुई मौत

इस हादसे में सत्य प्रकाश उपाध्याय उम्र 40 वर्ष उनकी पत्नी मेनका उपाध्याय उम्र 35 वर्ष, उनकी बेटी इशानी उपाध्याय उम्र 10 वर्ष व पुत्र स्नेह उपाध्याय उम्र 8 वर्ष शामिल हैं।

सतना के रेस्टोरेंट में रात को खाया खाना: दरअसल सभी सतना से मैहर की ओर जा रहे थे। परिवार द्वारा सतना के रेस्टोरेंट में रात साढ़े 10 बजे भोजन भी किया गया इस दौरान सभी ने सेल्फी भी ली जो अंतिम तस्वीर साबित हुई।

मैहर पहुंचे पुलिस अधीक्षक, ड्राइवर गिरफ्तार: घटना जीतनगर में हुई जिसके बाद ट्रक ड्राइवर मौके से फरार हो गया था। सूचना मिलते ही आधी रात पुलिस अधीक्षक सतना धर्मवीर सिंह भी मौके पर पहुंच गए। वहीं सूचना के बाद मौके पर मैहर सहित आस-पास का पुलिस बल भी पहुंच गया। बाद में ट्रक ड्राइवर को मैहर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित ड्राइवर हादसे से के बाद ट्रक छोड़ कर भाग निकला था और घटना स्थल के आस पास झाड़ियों में छिपा था पुलिस की सर्चिंग के बाद ड्राइवर पकड़ा गया।

सड़क निर्माण एजेंसी की भी लापरवाही: मैहर से लगा हुआ करीब पांच किलोमीटर में जीतनगर हैं, जहां निर्माण एजेंसी टीबीसीएल द्वारा सड़कों के किनारे कोई भी पट्टी नहीं बनाई गई हैं। जिसकी वजह से आए दिन लोग इस रोड में हादसे का शिकार होते है।

जिला व बिरला अस्पताल की सामने आई लापरवाही: इस हादसे ने जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रात को हादसे के बाद घायल बच्चे को सतना रिफर किया गया लेकिन जिला अस्पताल की ट्रामा यूनिट जो कि विशेष आपातकाल और गंभीर मरीजों के लिए ही होती है वहां कोई डॉक्टर नहीं था। इसी तरह जिले के सबसे बड़े चैरिटेबल ट्रस्ट बिरला अस्पताल प्रबंधक ने भी बच्चे का इलाज नहीं किया। जिसके बाद बच्चे को जबलपुर के लिए रिफर किया गया लेकिन इलाज में देरी के कारण बच्चे की मौत हो गई। इस हादसे के बाद अस्पतालें और चारमाई स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई सामने आ गई।

 

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